केदारनाथ के द्वार खुले: 51 क्विंटल फूलों से सजा बाबा का दरबार, पहली पूजा पीएम मोदी के नाम
केदारनाथ : हिमालय की गोद में विराजमान भगवान शिव के ग्यारहवें ज्योतिर्लिंग श्री केदारनाथ धाम के कपाट आज बुधवार, 22 अप्रैल 2026 को सुबह ठीक 8 बजे पूरे विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। कपाट खुलने के ऐतिहासिक क्षण पर मंदिर परिसर ‘हर-हर महादेव’ और ‘जय श्री केदार’ के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा। परंपरा के अनुसार, साल की पहली विशेष पूजा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम से संपन्न की गई।
कपाट खुलने के इस पावन मौके पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खुद मुख्य पुजारी और तीर्थ पुरोहितों के साथ मौजूद रहे। सेना की सिख रेजिमेंट के बैंड की मधुर धुनों ने वातावरण को और भी भक्तिमय बना दिया। मंदिर को करीब 51 क्विंटल विदेशी और स्थानीय फूलों से भव्य रूप से सजाया गया है। जैसे ही मंदिर के भारी द्वार खुले, आसमान से हेलीकॉप्टर के जरिए पुष्प वर्षा की गई, जिसे देखकर वहां मौजूद हजारों भक्त भाव-विभोर हो उठे।
मुख्यमंत्री धामी ने बाबा केदार के चरणों में शीश नवाकर देश और प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। उन्होंने कहा कि बाबा केदार का धाम भारतीय आध्यात्मिक विरासत का सबसे बड़ा प्रतीक है और राज्य सरकार यात्रियों की सुगम यात्रा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। धामी ने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे देवभूमि के आतिथ्य सत्कार का सम्मान करें और यात्रा के दौरान प्रशासन का सहयोग करें।
इस बार की यात्रा में श्रद्धालुओं के लिए कुछ नई और हाई-टेक सुविधाएं जोड़ी गई हैं। सरकार ने पहली बार केदारनाथ और लिंचोली जैसे ऊंचाई वाले इलाकों में 24 घंटे गर्म पानी की सुविधा शुरू की है। यह सुविधा पूरी तरह पर्यावरण के अनुकूल है, जिसमें ‘पीरुल’ (चीड़ की पत्तियां) और खच्चरों के लीद से बने बायोमास पेलेट्स का इस्तेमाल कर गीजर चलाए जा रहे हैं। इसके अलावा, इस साल से धाम में मोबाइल फोन और कैमरे का इस्तेमाल मंदिर परिसर के भीतर पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है।

कपाट खुलने की प्रक्रिया सुबह 5 बजे से ही शुरू हो गई थी। रावल भीमाशंकर लिंग, मुख्य पुजारी टी. गंगाधर और वेदपाठियों ने गर्भगृह में प्रवेश कर बाबा का अभिषेक किया। पिछले साल 51 लाख से ज्यादा यात्रियों के रिकॉर्ड के बाद, इस साल प्रशासन को और भी ज्यादा भीड़ की उम्मीद है। अब तक करीब 19 लाख श्रद्धालु यात्रा के लिए अपना पंजीकरण करा चुके हैं।
मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी और विधायक आशा नौटियाल भी इस दौरान उपस्थित रहे। सुरक्षा के लिहाज से सोनप्रयाग से लेकर केदारनाथ तक चप्पे-चप्पे पर पुलिस और एसडीआरएफ (SDRF) के जवान तैनात किए गए हैं। यात्रियों के लिए क्यू-मैनेजमेंट और डिजिटल टोकन सिस्टम लागू किया गया है ताकि दर्शन के लिए घंटों लंबी लाइनों में न खड़ा होना पड़े।
केदारनाथ की पंचमुखी डोली मंगलवार शाम को ही गौरीकुंड से धाम पहुंच गई थी। आज कपाट खुलने के साथ ही चारधाम यात्रा के तीन मुख्य पड़ाव खुल चुके हैं। यमुनोत्री और गंगोत्री के कपाट पहले ही 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया पर खुल गए थे, जबकि बदरीनाथ धाम के कपाट कल यानी 23 अप्रैल को सुबह खुलेंगे। प्रशासन ने यात्रियों को सलाह दी है कि वे खराब मौसम और कड़ाके की ठंड को देखते हुए पर्याप्त गर्म कपड़े साथ लाएं और रजिस्ट्रेशन के बिना यात्रा न करें।
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