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देहरादून में सुप्रिया श्रीनेत का गर्जना : महिला आरक्षण के नाम पर संघीय ढांचे से खिलवाड़

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संसद में 131वां संशोधन बिल क्यों हुआ फेल? सुप्रिया श्रीनेत ने देहरादून में खोली पोल

देहरादून (ब्यूरो)। कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने मोदी सरकार पर तीखा हमला करते हुए महिला आरक्षण बिल के पीछे छिपे ‘असली एजेंडे’ को बेनकाब किया है। उत्तराखंड कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन में पत्रकारों से मुखातिब होते हुए उन्होंने साफ कहा कि 2023 में लाया गया कानून सिर्फ एक चुनावी शिगूफा था। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने जानबूझकर इसे परिसीमन और जनगणना की ऐसी पेचीदगियों में फंसाया जिससे यह कभी धरातल पर न उतर सके।

हाल ही में संसद के विशेष सत्र में 131वें संविधान संशोधन विधेयक की विफलता को श्रीनेत ने लोकतंत्र की जीत बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष इस बिल के खिलाफ नहीं था, बल्कि इसके साथ थोपी जा रही उन शर्तों के खिलाफ था जो देश के संघीय ढांचे को तबाह कर सकती थीं। 17 अप्रैल 2026 को संसद में हुई वोटिंग के दौरान इस बिल को दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल पाया था, जिसे कांग्रेस अब अपनी नैतिक जीत मान रही है।

सुप्रिया श्रीनेत ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि सरकार का इरादा महिला सशक्तिकरण नहीं, बल्कि परिसीमन के जरिए दक्षिण भारतीय राज्यों की राजनीतिक ताकत को कम करना है। उन्होंने सवाल उठाया कि 2011 की पुरानी जनगणना के आधार पर सीटों का बंटवारा करना न केवल तर्कहीन है, बल्कि यह राज्यों के बीच लोकतांत्रिक असंतुलन पैदा करेगा। श्रीनेत ने जोर देकर कहा कि बिना जातिगत जनगणना के पिछड़ी जातियों (OBC) की महिलाओं को आरक्षण का लाभ मिलना नामुमकिन है।

सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि जब देश की बेटियों के सम्मान की बात आती है, तो प्रधानमंत्री मौन धारण कर लेते हैं। उन्होंने अंकिता भंडारी हत्याकांड, हाथरस की घटना और मणिपुर में तीन सालों से जारी हिंसा का जिक्र करते हुए पूछा कि वहां की महिलाओं की चीखें सरकार को क्यों नहीं सुनाई देतीं? उन्होंने कहा कि सरकार ने मणिपुर पर चुप्पी साध रखी है, जो उनके महिला सशक्तिकरण के दावों की पोल खोलता है।

प्रेस वार्ता में मौजूद उत्तराखंड कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को सीधी चुनौती दी। गोदियाल ने कहा कि यदि भाजपा सरकार वाकई महिलाओं को हक देना चाहती है, तो विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर आरक्षण का प्रस्ताव लाए। उन्होंने व्यक्तिगत त्याग की घोषणा करते हुए कहा कि यदि परिसीमन के बाद उनकी अपनी सीट किसी महिला के लिए आरक्षित होती है, तो वे बिना किसी हिचक के अपनी दावेदारी छोड़ देंगे।

कार्यक्रम में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने भाजपा के उस ‘नैरेटिव’ को भी खारिज किया जिसमें विपक्ष को महिला विरोधी बताया जा रहा है।

श्रीनेत ने याद दिलाया कि कांग्रेस ने ही 73वें और 74वें संविधान संशोधन के माध्यम से पंचायतों और नगर निकायों में महिलाओं को वास्तविक सत्ता सौंपी थी। उन्होंने मांग की कि सरकार को तुरंत 2029 का इंतजार किए बिना मौजूदा लोकसभा सीटों पर ही महिला आरक्षण लागू करना चाहिए।

इस मौके पर मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी और सोशल मीडिया नेशनल कोऑर्डिनेटर सरदार अमरजीत सिंह सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे। कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि वह महिलाओं के नाम पर लोकतंत्र को कमजोर करने की किसी भी कोशिश को सड़क से संसद तक चुनौती देना जारी रखेगी।

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