ऑपरेशन प्रहार का बड़ा एक्शन : देहरादून में दिल्ली-गाजियाबाद के ‘ATM मास्टर’ गिरफ्तार
देहरादून (ब्यूरो)। उत्तराखंड की राजधानी में ‘ऑपरेशन प्रहार’ के तहत दून पुलिस ने एक अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है जो एटीएम कार्ड बदलकर मासूम लोगों की गाढ़ी कमाई पर डाका डालता था। एसएसपी देहरादून के कड़े निर्देशों के बाद प्रेमनगर थाना पुलिस ने जाल बिछाकर तीन शातिर अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से पुलिस ने विभिन्न बैंकों के 66 एटीएम कार्ड और वारदात में इस्तेमाल होने वाली हुंडई वेन्यू कार बरामद की है।
पुलिस कप्तान की कुशल रणनीति के चलते झाझरा चौकी प्रभारी अमित शर्मा की टीम को बड़ी कामयाबी हाथ लगी। मुखबिर की सटीक सूचना पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने चेकिंग के दौरान यूपी नंबर की सफेद वेन्यू कार (UP-14-FH-7340) को रोका। कार सवार तीन संदिग्धों से जब सख्ती से पूछताछ की गई और वाहन की तलाशी ली गई, तो पुलिस के भी होश उड़ गए। आरोपियों के कब्जे से भारी मात्रा में अवैध रूप से रखे गए एटीएम कार्ड्स बरामद हुए।
पकड़े गए अभियुक्तों की पहचान इमरान अली (गाजियाबाद), नसीरुद्दीन (दिल्ली) और मोहम्मद खालिद (गाजियाबाद) के रूप में हुई है।
पूछताछ में सामने आया कि यह गैंग मुख्य रूप से उन बुजुर्गों और सीधे-साधे लोगों को निशाना बनाता था जिन्हें मशीन से पैसे निकालने में कठिनाई होती थी। मदद के बहाने ये ठग मशीन के पास खड़े हो जाते थे और चुपके से पीड़ित का पिन देख लेते थे। नजर चूकते ही ये हाथ की सफाई दिखाते हुए असली एटीएम को अपने पास रखे फर्जी कार्ड से बदल देते थे।
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि इस गिरोह ने अब तक अलग-अलग खातों से करीब 25 लाख रुपये से अधिक की रकम उड़ा ली है। हाल ही में विकासनगर के हरबर्टपुर क्षेत्र में इन्होंने एक व्यक्ति का एटीएम बदलकर 50 हजार रुपये निकाले थे, जिसके संबंध में विकासनगर कोतवाली में मुकदमा दर्ज है। पुलिस अब इन अभियुक्तों के अन्य आपराधिक रिकॉर्ड और ट्रांजैक्शन डिटेल्स खंगाल रही है ताकि ठगी की कुल रकम का सटीक आकलन किया जा सके।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों के खिलाफ थाना प्रेमनगर में बीएनएस की धारा 318(4) और 317(2)(3) के तहत मुकदमा पंजीकृत कर लिया गया है। पुलिस टीम में चौकी प्रभारी अमित शर्मा के साथ कांस्टेबल श्रीकांत, बृजमोहन और अनीश शामिल रहे, जिन्होंने इस ऑपरेशन को अंजाम दिया।
आमतौर पर ऐसे गिरोह केवल लोकल स्तर पर सक्रिय रहते हैं, लेकिन इस गैंग का दिल्ली और एनसीआर से जुड़े होना एक बड़े नेटवर्क की ओर इशारा करता है। देहरादून पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि एटीएम के भीतर किसी भी अनजान व्यक्ति की सहायता न लें और अपना पिन पूरी तरह गोपनीय रखें। साइबर एक्सपर्ट्स का मानना है कि ऐसे मामलों में ‘शोल्डर सर्फिंग’ तकनीक का इस्तेमाल होता है, जिससे अपराधी पीड़ित के कंधे के पीछे से पिन कोड देख लेते हैं।
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