एसएसपी देहरादून के निर्देश पर एसआईटी की कार्रवाई, फर्जीवाड़ा करने वालों पर कसेगा शिकंजा
देहरादून। नीट यूजी 2025 (NEET UG 2025) में कूट रचित एवं फर्जी दस्तावेजों के बल पर एमबीबीएस सीट हथियाने के गंभीर प्रकरण में देहरादून पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने मामले में संलिप्त दो और मुख्य अभियुक्तों को दबोच लिया है। इसके साथ ही इस पूरे मेडिकल एडमिशन स्कैम में गिरफ्तार किए गए आरोपियों की कुल संख्या अब पांच तक पहुंच गई है।
पूरा मामला 13 सितंबर 2026 को उस समय सामने आया जब उत्तराखंड के ‘अपनी सरकार पोर्टल’ के जरिए स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र बनाने के लिए ऑनलाइन आवेदन किए गए। रायपुर थाना (मु0अ0सं0- 380/26) और क्लेमेंटाउन थाना (मु0अ0सं0- 86/26) में प्राप्त तहरीरों के आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं—318(4), 338, 336(2), 340(2) और 61(2)—के तहत मामले दर्ज किए। जांच के दौरान अभ्यर्थियों द्वारा सबमिट किए गए सभी कागजात फर्जी पाए गए।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून प्रमेंद्र सिंह डोभाल ने एसपी ग्रामीण-1 जया बलोनी की अगुवाई में एक विशेष जांच टीम गठित की। एसआईटी ने जब अभ्यर्थियों के दस्तावेजों में दिए गए पतों का सत्यापन किया तो वे फर्जी निकले। इसके बाद टीम ने सीधे संबंधित शिक्षण संस्थानों और मेडिकल कॉलेजों का रुख किया, जहां से प्राप्त मूल दस्तावेजों और रिकॉर्ड के अवलोकन के बाद अभ्यर्थियों के वास्तविक पतों का खुलासा हुआ।
प्राप्त साक्ष्यों के आधार पर एसआईटी ने संजय कुमार (मूल निवासी सारनाथ, वाराणसी, यूपी) और गिरीश सिंह (मूल निवासी गंगोलीहाट, पिथौरागढ़, उत्तराखंड) को हिरासत में लेकर रायपुर थाने में पूछताछ की। साक्ष्य पुख्ता होने पर दोनों को मौके से गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ में सामने आया कि संजय और गिरीश साल 2007 से एक-दूसरे से परिचित हैं।
दोनों ने मिलकर तीन महिला अभ्यर्थियों—स्वाति, परी और खुशी—के फर्जी आधार कार्ड, उत्तराखंड डोमिसाइल (निवास प्रमाण पत्र) और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र तैयार करवाए थे। इसके एवज में उन्होंने अभ्यर्थियों के परिजनों से भारी अनुचित धनराशि ऐंठी थी।
इससे पहले एसआईटी ने इस गिरोह के तीन अन्य सदस्यों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था, जिनमें रुपेश पंडित (निवासी पूर्णिया, बिहार; हाल निवासी मेरठ, यूपी), अरविंद कुमार (निवासी लक्सर, हरिद्वार) और धीरज कुमार श्रीवास्तव (निवासी भोपाल, मध्य प्रदेश) शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि प्रकरण से जुड़े सभी तकनीकी व वित्तीय पहलुओं की गहनता से विवेचना जारी है और गिरोह के अन्य मददगारों को भी जल्द बेनकाब किया जाएगा।
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