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Chhath Puja Kharna : छठ पूजा के दूसरे दिन कैसे करें खरना सही तरीके से, पूरी जानकारी

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Chhath Puja Kharna : छठ पूजा भारत के सबसे पवित्र और अनुशासित पर्वों में से एक है। खासकर बिहार में यह महापर्व बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। हालांकि आज यह पर्व उत्तर प्रदेश, झारखंड और अन्य क्षेत्रों में भी बहुत श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।

छठ पूजा चार दिनों तक चलती है, और इन चार दिनों में खरना, यानी दूसरे दिन का व्रत, सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। खरना का दिन व्रती महिलाओं और परिवार के लिए एक ऐसा दिन होता है, जब पूरे दिन उपवास रखा जाता है और संकल्पपूर्वक पूजा-अर्चना की जाती है।

सूर्यास्त के बाद व्रती पूरे दिन का उपवास तोड़ते हैं, लेकिन इससे पहले कई महत्वपूर्ण नियमों का पालन करना आवश्यक होता है। यदि आप इन बातों का ध्यान नहीं रखेंगे, तो खरना का महत्व अधूरा रह सकता है।

खरना के दिन क्या करें और क्या न करें

साफ-सफाई का ध्यान रखें

पूजा में इस्तेमाल होने वाली वस्तुएं, जैसे कि थाली, मिट्टी के चूल्हे, पत्तल या प्रसाद बनाने का सामान, हमेशा साफ हाथों से ही छूएं। गंदे हाथों से वस्तुएं छूना अशुभ माना जाता है।

सामान को साफ हाथों से ही छूएं

अगर किसी ने गलती से गंदे हाथ से पूजा का सामान छू लिया है, तो उसे इस्तेमाल न करें। यह छोटे-छोटे नियम आपको व्रत में सफलता दिलाते हैं।

प्रसाद बनाने की जगह हमेशा स्वच्छ हो

प्रसाद तैयार करने के स्थान की सफाई बेहद जरूरी है। गंदगी वाली जगह पर प्रसाद बनाने से पूजा का महत्व कम हो सकता है।

सूर्य देव और छठी मैया को प्रसाद चढ़ाने के बाद ही भोजन करें

खरना के दिन व्रती और उनके परिवार वाले तब तक भोजन नहीं करते जब तक सूर्य देव और छठी मैया को प्रसाद अर्पित न कर दिया जाए।

सेंधा नमक का ही उपयोग करें

प्रसाद में केवल सेंधा नमक ही इस्तेमाल करें। अन्य किसी प्रकार का नमक ग्रहण न करें, यह परंपरा का हिस्सा है।

खरना का प्रसाद और बनावट

खरना वाले दिन प्रसाद में गुड़ की खीर और रोटी बनाई जाती है। यह प्रसाद मिट्टी के नए चूल्हे पर बनाया जाना चाहिए।

परंपरा के अनुसार, आम की लकड़ियों का उपयोग ही चूल्हे के लिए किया जाता है। किसी अन्य लकड़ी का इस्तेमाल अशुभ माना जाता है।

टिप्स

प्रसाद बनाने से पहले हाथ अच्छी तरह धोएं। प्रसाद बनाते समय मन शुद्ध और ध्यान केंद्रित रखें।

पूरे परिवार के साथ मिलकर पूजा करना शुभ माना जाता है।

उपवास के बाद भोजन करने से पहले सूर्य देव और छठी मैया को प्रसाद चढ़ाना अनिवार्य है।

खरना का दिन सिर्फ उपवास रखने का दिन नहीं, बल्कि आत्म-संयम और परंपरा का दिन है। इन छोटे-छोटे नियमों का पालन करने से छठ पूजा का महत्व बढ़ता है और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

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