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Dhanteras Muhurat : कब करें धनतेरस पूजन, जानिए त्रयोदशी का स्थिर मुहूर्त और लक्ष्मीजी की विशेष कृपा

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Dhanteras Muhurat : धनतेरस भारतीय त्योहारों में से एक अत्यंत शुभ और महत्वपू्र्ण पर्व है। इसे त्रयोदशी तिथि के दिन मनाया जाता है।

इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा के साथ-साथ धातु, सोना, चांदी, वाहन, बर्तन और अन्य संपत्ति खरीदने की परंपरा सदियों से चली आ रही है।

ऐसा माना जाता है कि इस दिन स्थिर लग्न या प्रदोष काल में की गई खरीदारी से घर में ऐश्वर्य, समृद्धि और सौभाग्य का आगमन होता है।

धनतेरस का महत्व

धनतेरस का पर्व त्रयोदशी तिथि के दौरान मनाया जाता है। इसे ‘धन का त्यौहार’ भी कहा जाता है क्योंकि यह ऐश्वर्य और संपत्ति की वृद्धि का प्रतीक है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के समय कलश के साथ माता लक्ष्मी का अवतरण हुआ। यही कारण है कि इस दिन धातु या मिट्टी के कलश खरीदना अति शुभ माना जाता है।

साथ ही, यह तिथि आयुर्वेद के प्रवर्तक भगवान धन्वंतरि की जयंती से भी जुड़ी हुई है। ऐसा कहा जाता है कि भगवान धन्वंतरि का जन्म इसी प्रदोष काल में हुआ था।

इसलिए इस दिन स्थिर लग्न में बर्तन और धातु खरीदना अत्यंत शुभफलदायक माना जाता है।

इस वर्ष धनतेरस और त्रयोदशी पूजन का मुहूर्त

2025 में त्रयोदशी तिथि 18 अक्टूबर, शनिवार से 19 अक्टूबर, रविवार तक रहेगी। इस दौरान पूजन के लिए कुछ खास स्थिर लग्न समय इस प्रकार हैं:

18 अक्टूबर, शनिवार – कुम्भ लग्न: दोपहर 02:21 से 03:46 बजे तक

18 अक्टूबर, शनिवार – वृष लग्न: शाम 06:59 से 08:56 बजे तक

19 अक्टूबर, रविवार – सिंह लग्न: मध्य रात्रि 01:27 से 03:40 बजे तक

19 अक्टूबर, रविवार – वृश्चिक लग्न: सुबह 08:10 से 10:25 बजे तक

धनतेरस पूजन की परंपरा

धनतेरस के दिन विशेष रूप से शनि प्रदोष व्रत का पालन भी किया जाता है। व्रत रखकर प्रदोष काल में भगवान शिव, माता पार्वती और माता लक्ष्मी की पूजा करना अत्यंत फलदायक होता है।

ऐसा माना जाता है कि इससे व्यक्ति की संतान से संबंधित समस्याओं का निवारण होता है और घर में सुख-समृद्धि का प्रवेश होता है।

इस दिन बर्तन, सोना, चांदी, रत्न और अन्य धातुओं की खरीदारी करने से घर में ऐश्वर्य और धन की वृद्धि होती है। खासकर धातु या मिट्टी के कलश का खरीदना अत्यंत शुभ माना जाता है।

धनतेरस पर ध्यान रखने योग्य बातें

हमेशा स्थिर लग्न या प्रदोष काल में ही खरीदारी करें।

धातु या मिट्टी का कलश अवश्य खरीदें।

शनि प्रदोष व्रत का पालन करें और प्रदोष काल में पूजन करें।

घर के प्रवेश द्वार और पूजा स्थल को स्वच्छ रखें।

धनतेरस केवल खरीदारी का पर्व नहीं, बल्कि यह शुभता, समृद्धि और सुख-शांति का प्रतीक भी है। इस दिन किए गए छोटे-छोटे कर्म भी जीवन में बड़ी खुशियाँ और सफलता ला सकते हैं।

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