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Karwa Chauth Veerawati Story : गणेश जी की कृपा पाने के लिए करवा चौथ पर पढ़ें वीरावती की यह अनोखी कहानी

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Karwa Chauth Veerawati Story : करवा चौथ का व्रत भारतीय महिलाएं बड़े श्रद्धा और विश्वास के साथ करती हैं। ऐसा माना जाता है कि इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए व्रत रखती हैं।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि करवा चौथ का महत्व सिर्फ व्रत रखने तक सीमित नहीं है? इस व्रत का आरंभ गणेश जी की पूजा से होता है और इसके बाद ही करवा माता की पूजा होती है।

करवा चौथ पूजा में जरूरी सामग्री

करवा चौथ की पूजा में सास के लिए बायना रखा जाता है। बायना में शामिल होते हैं – पूरियां, मीठा, सुहाग का सामान, कपड़े।

इसके अलावा, पूजा में करवे (मिट्टी या चीनी के बने), रौली, सिंदूर, कलावा, पंचामृत, फल, कपूर, घूपबत्ती, गंगाजल, चावल, दीपक, रूई, कलावा, बताशे, पंच मेवा आदि का प्रयोग किया जाता है।

करवा चौथ पर गणेश जी की कथा

बहुत समय पहले की बात है, एक अंधी बुढ़िया थी जो गणेश जी की अति भक्ति करती थी। रोजाना विधिवत पूजा करने वाली इस बुढ़िया से एक दिन गणेश जी प्रसन्न हुए और दर्शन देकर वरदान देने का प्रस्ताव रखा।

बुढ़िया ने अपने बेटे और बहू से सलाह ली। बेटे ने कहा, “धन मांग लो।” बहू ने कहा, “पोता मांग लो।” लेकिन बुढ़िया ने सोचा कि ये सभी अपने स्वार्थ के लिए बोल रहे हैं।

फिर पड़ोसियों से पूछा, उन्होंने कहा, “तुम अपनी आंखें मांग लो, जिससे बाकी जीवन सुखमय बीते।”

अंततः बुढ़िया ने सोचा कि क्यों न ऐसा वरदान मांगे जिसमें सबका भला हो। अगले दिन गणेश जी ने पूछा, “क्या वर मांगना चाहती हो?” बुढ़िया ने कहा,

“हे गणराज! यदि आप मुझ पर प्रसन्न हैं तो मुझे नौ करोड़ की माया दें, निरोगी काया दें, अमर सुहाग दें, आंखों में प्रकाश दें, नाती-पोते दें, और समस्त परिवार को सुख दें। अंत में मोक्ष भी दें।”

गणेश जी ने प्रसन्न होकर बुढ़िया की सारी इच्छाएं पूरी कीं।

वीरावती की कथा: करवा चौथ का वास्तविक अर्थ

पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक साहूकार की बेटी वीरावती थी। उसके सात भाई थे। जब उसने पहली बार करवा चौथ का व्रत रखा, तो भूख-प्यास और कमजोरी के कारण वह थक गई।

भाईयों ने उसकी चिंता करते हुए एक योजना बनाई। उन्होंने पहाड़ी पर दीपक जलाकर ऐसा दृश्य बनाया जैसे चांद निकल आया हो।

वीरावती ने सोचा कि चांद निकल आया है और भाभियों से कहा कि व्रत खोल लो। भाभियों ने कहा कि हम तो चांद निकलने पर खोलेंगे, लेकिन वीरावती भाईयों की बात मान गई और व्रत खोल लिया।

इस गलती के कारण उसके पति की मृत्यु हो गई। वीरावती ने इस दुख से सीख ली और पूरी श्रद्धा के साथ मां पार्वती की पूजा करना शुरू किया।

अगले साल उसने पूरे साल की चौथ का व्रत रखा और करवा चौथ के दिन, मां पार्वती प्रसन्न हुईं और उसके पति को पुनः जीवित किया।

तब से महिलाएं श्रद्धा और विश्वास के साथ करवा चौथ का व्रत करती हैं, ताकि उनके पति की लंबी उम्र और जीवन में खुशहाली बनी रहे।

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