Karwa Chauth Puja : करवा चौथ का पर्व हर साल सुहागिन महिलाओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण व्रतों में से एक माना जाता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और वैवाहिक सौभाग्य के लिए निर्जला व्रत रखती हैं।
कहा जाता है कि करवा चौथ पर की गई पूजा और कथा-श्रवण से जीवन में अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
इस वर्ष करवा चौथ 10 अक्टूबर को मनाया जाएगा और इस बार का संयोग विशेष रूप से शुभ माना जा रहा है।
ज्योतिष के अनुसार, इस दिन चंद्रमा अपनी उच्च राशि वृषभ (Taurus) में विराजमान रहेंगे, जो सौभाग्य को कई गुना बढ़ाने वाला योग है।
भगवान गणेश की विशेष पूजा से मिलता है पूर्ण फल
करवा चौथ की पूजा में सबसे पहले भगवान श्री गणेश की आराधना की जाती है। गणेशजी को इस व्रत का साक्षी माना जाता है और उनके आशीर्वाद से व्रत सफल होता है।
महिलाएं इस दिन सुबह स्नान करके सोलह श्रृंगार करती हैं, फिर करवा, दीपक और मिट्टी के गणेशजी की स्थापना कर कथा सुनती हैं।
कथा के दौरान करवा माता, भगवान शिव-पार्वती और गणेशजी का स्मरण किया जाता है। इस दिन किया गया व्रत न केवल पति की दीर्घायु देता है बल्कि दांपत्य जीवन में प्रेम और सामंजस्य भी बनाए रखता है।
करवा चौथ की तिथि और व्रत का समय
करवा चौथ का पर्व 10 अक्टूबर 2025 (शुक्रवार) को मनाया जाएगा।
चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 9 अक्टूबर रात 10:54 बजे
चतुर्थी तिथि समाप्त: 10 अक्टूबर शाम 7:38 बजे
इस प्रकार सूर्योदय से सूर्यास्त तक पूरा दिन चतुर्थी तिथि रहेगी, इसलिए व्रत का पालन और पूजन 10 अक्टूबर को ही किया जाएगा।
कथा सुनने और पूजन का शुभ मुहूर्त
इस दिन सुबह 9:12 बजे से 10:30 बजे तक लाभ चौघड़िया मुहूर्त रहेगा — जो करवा चौथ कथा सुनने और पूजा करने के लिए अत्यंत मंगलकारी समय है।
यदि कोई महिला सुबह पूजा नहीं कर पाती, तो दोपहर 12:06 से 1:33 बजे तक का शुभ चौघड़िया भी पूजन के लिए उत्तम रहेगा।
इन मुहूर्तों में श्रद्धा और भावनाओं से की गई पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है।
रोहिणी नक्षत्र और चंद्रोदय का शुभ संयोग
इस वर्ष का करवा चौथ एक और विशेष वजह से खास है। शाम 5:30 बजे से रोहिणी नक्षत्र का आरंभ होगा। ठीक उसी समय जब चंद्रमा उदय होंगे, वे अपनी उच्च राशि वृषभ में रहेंगे।
यह योग अखंड सौभाग्य, वैवाहिक स्थिरता और प्रेम-बंधन को और मजबूत करने वाला माना गया है। इसलिए जब महिलाएं चांद को अर्घ्य देंगी, तो उन्हें इस अद्भुत संयोग का आशीर्वाद प्राप्त होगा।
व्रत का महत्व और मान्यता
करवा चौथ केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि स्त्री-समर्पण, प्रेम और विश्वास का प्रतीक है। ऐसा माना जाता है कि जो महिला पूर्ण श्रद्धा से यह व्रत करती है, उसके जीवन में कभी सौभाग्य की कमी नहीं होती।
इस दिन माता-पिता, सास-ससुर और परिवार के प्रति सम्मान भी व्यक्त किया जाता है। व्रत के अंत में महिलाएं चांद को अर्घ्य देकर अपने पति के हाथों जल ग्रहण करती हैं और व्रत खोलती हैं।
इस साल का करवा चौथ रोहिणी नक्षत्र और वृषभ राशि के चंद्रमा के संगम से और भी शुभ हो गया है। यदि पूजा सही समय पर और सही विधि से की जाए, तो यह व्रत जीवनभर के सौभाग्य का वरदान देता है।
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