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Shani Pradosh Muhurat : शनि प्रदोष व्रत पर बन रहा है द्विपुष्कर योग, जानें शुभ समय और महत्व

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Shani Pradosh Muhurat : आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि इस बार बेहद खास रहने वाली है, क्योंकि यह दिन शनिवार को पड़ रहा है।

शनिवार को जब प्रदोष व्रत आता है तो इसे शनि प्रदोष व्रत कहा जाता है। मान्यता है कि इस व्रत में भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करने पर संतान सुख, धन, वैभव और संपत्ति की प्राप्ति होती है।

इस बार शनि प्रदोष पर एक और विशेष योग बन रहा है – द्विपुष्कर योग। ज्योतिष शास्त्र में कहा गया है कि द्विपुष्कर योग में किया गया शुभ कार्य दोगुना फल देता है।

इसलिए यह दिन शिव उपासना और व्रत-पूजन के लिए अत्यंत फलदायी माना जा रहा है।

कब है शनि प्रदोष व्रत?

दृक पंचांग के अनुसार, आश्विन शुक्ल त्रयोदशी तिथि का आरंभ 4 अक्टूबर, शनिवार को शाम 5 बजकर 9 मिनट से होगा और इसका समापन 5 अक्टूबर, रविवार को दोपहर 3 बजकर 3 मिनट पर होगा।

चूंकि प्रदोष व्रत हमेशा संध्या काल में किया जाता है, इसलिए यह व्रत 4 अक्टूबर शनिवार को ही रखा जाएगा।

पूजा का शुभ मुहूर्त

शनि प्रदोष व्रत की पूजा शाम 6 बजकर 3 मिनट से रात 8 बजकर 30 मिनट तक की जाएगी। यानी भक्तों के पास भगवान शिव की पूजा के लिए ढाई घंटे से अधिक का शुभ समय रहेगा।

लाभ-उन्नति मुहूर्त: शाम 6:03 बजे से 7:35 बजे तक

ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:38 बजे से 5:27 बजे तक

अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:46 बजे से 12:33 बजे तक

निशिता मुहूर्त: रात 11:45 बजे से 12:34 बजे तक

द्विपुष्कर योग का महत्व

इस बार का प्रदोष व्रत इसलिए भी खास है क्योंकि इसमें द्विपुष्कर योग बन रहा है। यह योग 4 अक्टूबर की सुबह 6:16 बजे शुरू होगा और 9:09 बजे तक रहेगा।

इस दौरान किए गए कार्य विशेष रूप से शुभ फलदायी होंगे।

अन्य योग और नक्षत्र

सुबह से 7:27 बजे तक शूल योग रहेगा, उसके बाद गण्ड योग का आरंभ होगा।

प्रदोष के दिन धनिष्ठा नक्षत्र प्रातःकाल से सुबह 9:09 बजे तक रहेगा, जिसे धन प्राप्ति के लिए विशेष माना गया है।

इसके बाद शतभिषा नक्षत्र आरंभ होकर पूरी रात्रि तक रहेगा।

पंचक का संयोग

इस बार शनि प्रदोष के दिन पंचक भी पड़ रहा है। ज्योतिष के अनुसार, शुक्रवार से शुरू होने वाला पंचक ‘चोर पंचक’ कहलाता है, जिसमें वस्तुओं की चोरी का भय माना जाता है।

आश्विन मास का यह शनि प्रदोष व्रत भक्तों के लिए अत्यंत लाभकारी साबित होगा। द्विपुष्कर योग और पंचक जैसे विशेष संयोग इस दिन को और भी महत्वपूर्ण बना रहे हैं।

मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव का पूजन करने से समस्त कष्ट दूर होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

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