Surya Dev Statue Vastu : सूर्यदेव को वैदिक काल से ही अग्नि का स्वरूप और प्रत्यक्ष देवता माना गया है। वास्तु शास्त्र में सूर्य का विशेष महत्व बताया गया है, क्योंकि जीवन की ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत सूर्य ही है।
यदि हम सूर्य से जुड़ी कुछ सरल वास्तु उपायों को अपनाएं, तो जीवन में सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
ब्रह्ममुहूर्त और सूर्य की महिमा
सुबह सूर्योदय से पहले का समय, जिसे ब्रह्ममुहूर्त कहा जाता है, अध्ययन और मानसिक एकाग्रता के लिए श्रेष्ठ माना जाता है।
विद्यार्थियों को इस समय पढ़ाई करने से उत्तम फल मिलते हैं। स्वास्थ्य की दृष्टि से भी यह समय सबसे लाभकारी है।
सूर्योदय की किरणों का महत्व
सूर्योदय होते ही घर की खिड़कियां और दरवाजे खोल देना चाहिए ताकि सूर्य की पहली किरणें घर के भीतर आएं। इन किरणों को स्वास्थ्यवर्धक और शुभ माना जाता है।
घर में कृत्रिम रोशनी का कम से कम प्रयोग करना चाहिए और प्राकृतिक प्रकाश को महत्व देना चाहिए।
सूर्य प्रतिमा और वास्तु उपाय
यदि घर के किसी हिस्से में सूर्य का प्रकाश नहीं पहुंचता, तो वहां तांबे की सूर्य प्रतिमा स्थापित करना शुभ होता है। रसोईघर और स्नानघर में सूर्य का प्रकाश पहुंचाना चाहिए।
घर के पूर्व दिशा में सात घोड़ों पर सवार सूर्यदेव की तस्वीर लगाना बेहद मंगलकारी माना गया है। जहां आभूषण या धन रखा हो, वहां तांबे की सूर्य प्रतिमा रखने से आर्थिक संकट नहीं आता।
बच्चों के अध्ययन कक्ष में सूर्य की प्रतिमा लगाने से उनकी एकाग्रता और स्मरण शक्ति में वृद्धि होती है। अगर घर में कोई रोगी है तो उसके कमरे में सूर्य प्रतिमा अवश्य लगानी चाहिए, इससे स्वास्थ्य लाभ मिलता है।
वास्तु के अनुसार रसोई में तांबे की सूर्य प्रतिमा लगाने से कभी अन्न की कमी नहीं होती। दुकान या कार्यालय में सूर्य प्रतिमा रखने से उन्नति और सफलता के अवसर बढ़ते हैं।
घर के मंदिर में सूर्य प्रतिमा स्थापित करने से पूरे परिवार पर सूर्यदेव की कृपा बनी रहती है।
सूर्यदेव केवल ऊर्जा और प्रकाश के देवता ही नहीं बल्कि जीवन में समृद्धि, स्वास्थ्य और सफलता प्रदान करने वाले माने गए हैं।
वास्तु में बताए गए इन सरल उपायों को अपनाकर हर व्यक्ति अपने घर-परिवार में सुख, शांति और प्रगति का अनुभव कर सकता है।
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