हल्द्वानी प्रकरण में भाजपा सरकार की चुप्पी चिंताजनक : प्रीतम सिंह
हल्द्वानी प्रकरण में गरमाई राजनीति: प्रीतम सिंह के नेतृत्व में राजभवन पहुंची कांग्रेस, राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन
देहरादून। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष एवं राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष श्री मल्लिकार्जुन खड़गे की 8 अगस्त 2026 को हल्द्वानी स्थित रामलीला मैदान में आयोजित जनसभा के बाद हुए कथित “शुद्धिकरण यज्ञ” के मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और राज्य सरकार के रुख पर तीखे सवाल खड़े किए हैं। सोमवार को विधायक एवं चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने राजभवन जाकर राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा और मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की।
कांग्रेस ने अपने ज्ञापन में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया कि सार्वजनिक मंच को किसी नेता की पृष्ठभूमि अथवा जाति के आधार पर “अशुद्ध” करार देना और तत्पश्चात उसका शुद्धिकरण अनुष्ठान आयोजित करना केवल सामाजिक वैमनस्य को बढ़ावा नहीं देता, बल्कि यह सीधे तौर पर भारतीय संविधान के मूल्यों, सामाजिक न्याय और समानता के मौलिक अधिकारों का हनन है।
इस घटनाक्रम की गूंज देश की संसद तक पहुंच चुकी है। राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान स्वयं मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस मुद्दे को उठाते हुए अपनी पीड़ा व्यक्त की थी, जिसके बाद उच्च सदन के नेता और केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा ने मामले की गहन जांच कराने का आश्वासन दिया था। हालांकि, कांग्रेस का आरोप है कि संसद के पटल पर सरकार की ओर से दिए गए आश्वासन के बावजूद धरातल पर अब तक किसी भी दोषी व्यक्ति के विरुद्ध कोई प्रभावी कानूनी कार्रवाई नहीं की गई है। पार्टी ने कहा कि राज्य सरकार की यह रहस्यमयी चुप्पी सामाजिक सौहार्द और संवैधानिक परंपराओं को गंभीर खतरे में डाल रही है।
राजभवन में ज्ञापन सौंपने के दौरान प्रीतम सिंह ने कड़े शब्दों में कहा कि उत्तराखंड की पहचान एक पवित्र देवभूमि के रूप में है। इस पावन धरा पर छुआछूत, जातिगत भेदभाव या किसी भी प्रकार की संकीर्ण मानसिकता का प्रदर्शन कतई स्वीकार्य नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी संविधान की रक्षा और सामाजिक समानता की बहाली के लिए सड़क से लेकर सदन तक अपना संघर्ष जारी रखेगी।
कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए। ज्ञापन में जोर दिया गया कि घटना में शामिल दोषियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) तथा अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही भविष्य में किसी भी सार्वजनिक अथवा सांस्कृतिक मंच पर इस प्रकार की सामाजिक नफरत फैलाने वाली गतिविधियों को रोकने के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।
राजभवन पहुंचे इस प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता और विधायक शामिल थे। इनमें चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह, प्रदेश चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष डॉ. हरक सिंह रावत, पूर्व मंत्री शूरवीर सिंह सजवान, पूर्व मंत्री नव प्रभात, पूर्व विधायक जोत सिंह गुनसोला, विधायक मदन बिष्ट, विधायक विक्रम सिंह नेगी, पूर्व विधायक मनोज रावत, पूर्व विधायक राजकुमार, प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष ज्योति रौतेला, प्रदेश कोषाध्यक्ष गोदावरी थापली, मुख्य प्रवक्ता गरिमा महरा दसोनी, प्रदेश अध्यक्ष अनुसूचित जाति विभाग मदनलाल, पूर्व सैनिक विभाग के प्रदेश अध्यक्ष कर्नल राम रतन नेगी, पूर्व प्रदेश महामंत्री आरेंद्र शर्मा, प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना तथा प्रदेश उपाध्यक्ष लालचंद शर्मा सहित कई अन्य प्रमुख पदाधिकारी मौजूद रहे।
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