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देहरादून की सड़कों पर उतरी युवा सेना, महिला आरक्षण बिल लटकने पर भारी आक्रोश

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संसद में गिरा महिला आरक्षण विधेयक, उत्तराखंड में भड़का विरोध प्रदर्शन

देहरादून (ब्यूरो)। संसद में महिला आरक्षण से जुड़े 131वें संविधान संशोधन विधेयक के धराशायी होने की गूंज अब उत्तराखंड की राजधानी में सुनाई देने लगी है। देहरादून के तिलक रोड पर आज युवा सेना के कार्यकर्ताओं ने मोर्चा खोलते हुए केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

प्रदर्शनकारियों का साफ कहना है कि महिलाओं को 33 फीसदी राजनीतिक हिस्सेदारी देने के नाम पर सिर्फ चुनावी वादे किए गए और हकीकत में उन्हें उनके संवैधानिक अधिकार से वंचित रखा जा रहा है।

हाल ही में संसद के विशेष सत्र के दौरान महिला आरक्षण विधेयक आवश्यक दो-तिहाई बहुमत जुटाने में नाकाम रहा, जिसके बाद इसे पारित नहीं किया जा सका। इस विफलता की मुख्य वजह परिसीमन (Delimitation) को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच उपजा गहरा गतिरोध रहा। जहां सरकार जनगणना और नए परिसीमन के साथ इसे लागू करने की बात कह रही थी, वहीं विपक्षी दलों ने इसे फौरन अमल में लाने की मांग करते हुए संशोधनों पर असहमति जताई।

प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे प्रदेश अध्यक्ष सागर रघुवंशी ने दो टूक शब्दों में कहा कि महिला आरक्षण देश की आधी आबादी का मौलिक अधिकार है, इसे राजनीतिक शतरंज की चालों में उलझाना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने मांग की कि सरकार बिना किसी तकनीकी पेंच के इस विधेयक को तत्काल दोबारा पेश करे।

रघुवंशी के मुताबिक, महिलाओं को उनका हक देने में हो रही देरी यह दर्शाती है कि सियासी गलियारों में इच्छाशक्ति की भारी कमी है।

महानगर उपाध्यक्ष सुमित चौधरी ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि संसद में महिलाओं की आवाज को दबाने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर सदन के भीतर न्याय नहीं मिला, तो युवा शक्ति सड़कों पर उतरकर इस आंदोलन को और उग्र बनाएगी। उनके अनुसार, यह सिर्फ एक राजनीतिक मांग नहीं बल्कि महिलाओं के सम्मान और आत्म-अधिकार की निर्णायक लड़ाई है।

महानगर महासचिव मनोज रावत ने भी इस मुद्दे पर तीखे प्रहार किए। उन्होंने कहा कि महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने के दावों की हवा निकल चुकी है और अब युवा सेना इस संघर्ष को अंजाम तक पहुंचाएगी। संगठन ने यह भी स्पष्ट किया है कि जब तक आरक्षण की संवैधानिक गारंटी नहीं मिलती, तब तक उत्तराखंड के हर जिले में चरणबद्ध तरीके से प्रदर्शन किए जाएंगे। तिलक रोड पर हुए इस शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने हाथों में पोस्टर और बैनर लेकर सशक्तिकरण के पक्ष में नारे बुलंद किए।

आंदोलन में गौतम बाली, शिवम् गुप्ता, आयुष पासवान, रोहित प्रीत, अनुज वरुण और राहुल सूद सहित बड़ी संख्या में युवा सैनिक मौजूद रहे। इसके अलावा शुभम, देवराज, शिव कुमार, विशाल पाल, राजा, अनिल पुंडीर, मोनू रावत और गुरमीत चौहान ने भी महिलाओं के संवैधानिक अधिकारों के लिए आवाज उठाई।

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