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Dehradun : उत्तराखंड का बजट अटका, अजय भट्ट ने लोकसभा में पूछा सवाल

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देहरादून/नई दिल्ली : उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में हर घर तक नल से स्वच्छ जल पहुंचाने का सपना पूरा करने वाली जल जीवन मिशन योजना इन दिनों बजट की कमी से जूझ रही है।

बुधवार को लोकसभा में नैनीताल-ऊधमसिंहनगर के सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय भट्ट ने इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल से सवाल किया कि आखिर इस साल उत्तराखंड के लिए योजना का बाकी बजट क्यों नहीं जारी किया गया?

पहाड़ों में काम सिर्फ 4-5 महीने ही संभव

अजय भट्ट ने सदन को याद दिलाया कि उत्तराखंड एक पर्वतीय राज्य है। यहां हर साल भारी बारिश, भूस्खलन और बर्फबारी की वजह से निर्माण कार्य सिर्फ गर्मियों के 4-5 महीनों में ही हो पाता है। इसके बावजूद राज्य ने जल जीवन मिशन में अच्छी प्रगति दिखाई है। उन्होंने कहा, “जब राज्य अपना हिस्सा ईमानदारी से निभा रहा है, तो केंद्र को भी बिना देरी के बाकी राशि जारी करनी चाहिए।”

केंद्र ने मानी गड़बड़ियां, 119 टीमों ने की जांच

जवाब में केंद्रीय मंत्री सीआर पाटिल ने खुलासा किया कि देश के कई राज्यों में जल जीवन मिशन में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं पाई गई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर पूरे देश में 119 विशेष टीमों ने जांच की, जिसमें 4000 से ज्यादा ठेकेदार, अधिकारी और यहां तक कि कुछ मंत्री स्तर के लोग भी कार्रवाई के दायरे में आए हैं। सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने के लिए पत्र लिखा गया है।

मंत्री ने बताया कि उत्तराखंड में भी कुछ प्रस्तावों में तकनीकी खामियां मिलीं, जिनकी वजह से 309.5 करोड़ रुपये की राशि को “अस्वीकार्य” मान लिया गया। लेकिन अच्छी खबर ये है कि बाकी राशि जल्द कैबिनेट की मंजूरी मिलते ही जारी कर दी जाएगी।

अब तक कितना पैसा आया, कितना बाकी?

  • 2019 से अब तक केंद्र ने जल जीवन मिशन के लिए देशभर में 2 लाख 8 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा मंजूर किए।
  • उत्तराखंड को अब तक 5193.75 करोड़ रुपये मिले, राज्य सरकार ने अपना हिस्सा 1260.68 करोड़ रुपये दिया।
  • कुल स्वीकृत लागत करीब 9735 करोड़ रुपये है।
  • अस्वीकार्य राशि हटाने के बाद भी केंद्र को राज्य को करीब 3289 करोड़ रुपये और देने हैं।

आखिर ये देरी क्यों मायने रखती है?

विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में पानी की समस्या बहुत गंभीर है। ऊंचाई पर पाइपलाइन बिछाना, ट्रीटमेंट प्लांट बनाना और टैंकरों पर निर्भरता खत्म करना आसान नहीं। अगर बजट समय पर नहीं आया तो हजारों गांवों में नल लगने का काम रुक जाएगा और लोग फिर से पुरानी मुश्किलों की ओर लौट जाएंगे। एक सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “पहाड़ों में एक साल की देरी मतलब दो-तीन साल का नुकसान, क्योंकि मौसम सिर्फ कुछ महीने साथ देता है।”

उम्मीद की किरण

केंद्रीय मंत्री ने आश्वासन दिया है कि जैसे ही कैबिनेट की मंजूरी मिलेगी, उत्तराखंड का बाकी बजट तुरंत जारी कर दिया जाएगा। सांसद अजय भट्ट ने भी सदन में इस मुद्दे को लगातार उठाने का वादा किया है।

अब देखना ये है कि नए साल से पहले पहाड़ के घरों में नल खुलेंगे या फिर इंतजार और लंबा होगा।

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