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Diwali Narak Chaturdashi Date : इस बार कब है नरक चतुर्दशी और दिवाली की पूजा, जानें शुभ समय और पूजन विधि

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Diwali Narak Chaturdashi Date : भारत में दीपावली का त्योहार सिर्फ रोशनी का नहीं, बल्कि आस्था, समृद्धि और शुभ ऊर्जा का प्रतीक है। यह पाँच दिन तक चलने वाला पर्व धनतेरस से शुरू होकर भैया दूज तक मनाया जाता है।

हर दिन का अपना विशेष धार्मिक महत्व होता है और सही मुहूर्त में पूजा करने से देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की कृपा प्राप्त होती है।

दिवाली 2025 कब है? पाँच दिन का पूरा कैलेंडर

इस साल दीपावली पर्व 18 अक्टूबर 2025 से शुरू होकर 23 अक्टूबर 2025 तक चलेगा। नीचे इन पाँचों दिनों की प्रमुख तिथियाँ दी गई हैं —

  • 18 अक्टूबर (शनिवार): धनतेरस
  • 19 अक्टूबर (रविवार): नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली)
  • 20 अक्टूबर (सोमवार): मुख्य दिवाली / लक्ष्मी-गणेश पूजा
  • 22 अक्टूबर (बुधवार): गोवर्धन पूजा
  • 23 अक्टूबर (गुरुवार): भैया दूज

नरक चतुर्दशी 2025 (छोटी दिवाली) का शुभ मुहूर्त

नरक चतुर्दशी को छोटी दिवाली कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर राक्षस का वध कर पृथ्वी को भयमुक्त किया था। इसीलिए इसे नरक चतुर्दशी या काली चौदस कहा जाता है।

  • तिथि प्रारंभ: 19 अक्टूबर 2025, दोपहर 1:51 बजे
  • तिथि समाप्त: 20 अक्टूबर 2025, दोपहर 3:44 बजे
  • जा का शुभ मुहूर्त: सुबह 7:47 से दोपहर 12:26 तक
  • काली चौदस पूजा समय: रात 11:41 से 12:31 बजे तक
  • हनुमान पूजा मुहूर्त: रात 11:41 से 12:31 बजे तक

इस दिन यम दीपदान करने की परंपरा भी है। माना जाता है कि घर के बाहर दक्षिण दिशा में दीपक जलाने से अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है और पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

दीपावली 2025: लक्ष्मी-गणेश पूजा का शुभ मुहूर्त

  • मुख्य दिवाली सोमवार, 20 अक्टूबर 2025 को मनाई जाएगी। इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा का विशेष महत्व है।
  • लक्ष्मी पूजन मुहूर्त: शाम 5:44 बजे से 7:19 बजे तक
  • वृषभ लग्न स्थिर मुहूर्त: शाम 7:05 बजे से रात 9:01 बजे तक
  • निशीथ काल पूजा: देर रात 1:36 से 3:53 बजे तक (सिंह लग्न)
  • इस दिन परिवार सहित पूजा करने से धन, सौभाग्य और सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।

दिवाली पूजा सामग्री की पूरी सूची

पूजा सामग्री का हर एक तत्व शुभता और सकारात्मकता का प्रतीक होता है। यहाँ दी गई सूची से आप अपनी पूजा की तैयारी पूरी कर सकते हैं —

घी, पान, लौंग, रोली, फूल, फल, दूर्वा, कपूर, जनेऊ, सुपारी, कलावा, धूपबत्ती, पंचामृत, कुमकुम, गंगाजल, खील-बताशे, लाल कपड़ा, चौकी, घी का दीपक, हल्दी की गांठ, लकड़ी की चौकी, लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियाँ।

इन वस्तुओं से सुसज्जित पूजन करने से सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि का वास माना जाता है।

छोटी-बड़ी दिवाली का धार्मिक महत्व

छोटी दिवाली यानी नरक चतुर्दशी और बड़ी दिवाली दोनों ही आत्मशुद्धि और प्रकाश के प्रतीक हैं।

एक दिन पहले की पूजा से नकारात्मक ऊर्जाएँ नष्ट होती हैं, जबकि मुख्य दिवाली की पूजा से घर में देवी लक्ष्मी का वास होता है।

इस दिन घर को साफ-सुथरा रखना, दीप जलाना और परिवार के साथ मिलकर पूजा करना शुभ माना जाता है।

दिवाली का त्योहार सिर्फ दीप जलाने का नहीं, बल्कि जीवन में उजाला भरने का प्रतीक है। सही मुहूर्त और श्रद्धा से की गई पूजा से जीवन में सुख, शांति और धन-वैभव का आगमन होता है।

इस साल के दिवाली-मुहूर्त के अनुसार पूजा की तैयारी करें और इस पावन पर्व को पूरे उल्लास के साथ मनाएँ।

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