बद्रीनाथ में शंख बजाने के बयान पर बवाल, कांग्रेस ने महाराज के दावे को बताया अज्ञानता
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‘शंख हड्डी नहीं कैल्शियम का खोल’, सतपाल महाराज के बयान पर सूर्यकांत धस्माना का तीखा पलटवार
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पूछा-शंख हड्डी है तो सनातन धर्म की पूजा में पवित्र कैसे? : सूर्यकांत धस्माना
देहरादून। श्री बद्रीनाथ धाम में पिछले दिनों हुए सांस्कृतिक कार्यक्रम और लाउड डीजे बजाने को लेकर शुरू हुआ विवाद अब धार्मिक और वैज्ञानिक बहस में बदल गया है। उत्तराखंड सरकार के संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज द्वारा शंख को ‘हड्डी से बना’ बताने वाले बयान पर प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने जोरदार हमला बोला है।
देहरादून स्थित कांग्रेस मुख्यालय में पत्रकारों से वार्ता करते हुए धस्माना ने इस बयान को अज्ञानता की पराकाष्ठा करार दिया और मंत्री से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की। सूर्यकांत धस्माना ने कैबिनेट मंत्री के दावे को खारिज करते हुए इसका वैज्ञानिक और पौराणिक पक्ष सामने रखा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि शंख कोई हड्डी नहीं है, बल्कि समुद्र में पाए जाने वाले मल्लस्क श्रेणी के जीव घोंघे का बाहरी कवच (एक्सोस्केलेटन) है। यह कैल्शियम कार्बोनेट से निर्मित एक बेजान और पवित्र आवरण है। धस्माना ने सवाल उठाया कि यदि शंख वास्तव में हड्डी होता, तो सनातन धर्म में हजारों वर्षों से इसे पूजा-अर्चना, देवालयों और जलाभिषेक में इतना पवित्र स्थान कैसे प्राप्त होता?
उन्होंने बताया कि बद्रीनाथ धाम में शंख न बजाए जाने के पीछे वैज्ञानिक नहीं, बल्कि गहरे पौराणिक और आध्यात्मिक कारण हैं। पहला कारण यह है कि बद्रीनाथ धाम मुख्य रूप से भगवान बद्रीनारायण की तपस्थली और योग-ध्यान का केंद्र है।
शास्त्रों के अनुसार यहाँ भगवान स्वयं निरंतर ध्यान में लीन रहते हैं, इसलिए शंख की तीव्र ध्वनि से भगवान का ध्यान और क्षेत्र में तपस्या कर रहे ऋषियों-मुनियों का वातावरण भंग न हो, इसलिए यहाँ शंख ध्वनि वर्जित रखी जाती है। दूसरा कारण यह है कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार शंख में धन और समृद्धि की देवी माता लक्ष्मी का वास होता है और बद्रीनाथ धाम में माता लक्ष्मी स्वयं भगवान विष्णु की सेवा में उपस्थित रहती हैं, इसलिए यहाँ पृथक से शंख बजाने की आवश्यकता नहीं मानी जाती।
कांग्रेस उपाध्यक्ष ने आरोप लगाया कि असली मुद्दा बद्रीनाथ जैसे अति-संवेदनशील और इको-सेंसिटिव जोन में तेज आवाज वाले डीजे और म्यूजिक सिस्टम बजाकर मर्यादा भंग करने का है। पर्यावरणविदों और तीर्थ पुरोहितों ने धाम की शांत पारिस्थितिकी पर पड़ रहे प्रभाव को लेकर चिंता जताई थी। कांग्रेस का कहना है कि अपनी इस प्रशासनिक और सांस्कृतिक चूक को छिपाने के लिए सरकार के सबसे वरिष्ठ मंत्री शंख को हड्डी बताकर जनता को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं।
कांग्रेस ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से भी इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग करते हुए कहा कि सरकार को तुरंत स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए कि क्या राज्य का धर्मस्व विभाग शंख को हड्डी मानता है या मंत्री अपने अज्ञानतापूर्ण बयान पर खेद व्यक्त करेंगे।
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