देहरादून में 500 से अधिक प्रधानाचार्यों का महाजुटान, डीबीएस ग्लोबल यूनिवर्सिटी में गूंजा शिक्षा में एआई का मंत्र
देहरादून (रजत शर्मा) : देश की अग्रणी एआई यूनिवर्सिटी के रूप में पहचान बना चुके डीबीएस ग्लोबल यूनिवर्सिटी के सेलाकुई परिसर में शिक्षाविदों का एक बड़ा समागम देखने को मिला। ऑल इंडिया प्रिंसिपल एसोसिएशन (AIPA) और नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडिपेंडेंट स्कूल्स (NFIS) के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय शिक्षा उत्कृष्टता पुरस्कार 2026 एवं प्रिंसिपल कॉन्क्लेव का भव्य आयोजन किया गया। इस ऐतिहासिक समारोह में देश के कोने-कोने से 500 से अधिक विद्यालय प्रधानाचार्यों, शिक्षाविदों और शैक्षिक प्रशासकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
यह आयोजन पारंपरिक पुरस्कार समारोहों से काफी अलग नजर आया क्योंकि इसने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के जरिए शिक्षा के बदलते स्वरूप को सबके सामने रखा। देश भर से जुटे स्कूल प्रमुखों ने इस दौरान लाइव अनुभव किया कि कैसे आधुनिक तकनीक और एआई आने वाले समय में शिक्षण पद्धतियों और स्कूली व्यवस्था को पूरी तरह बदलने की क्षमता रखते हैं।
विश्वविद्यालय ने अपनी एआई विशेषज्ञता को प्रदर्शित करते हुए इस राष्ट्रीय कॉन्क्लेव के दौरान पहली बार एक विशेष एआई कार्यशाला का संचालन किया। इस महत्वपूर्ण कार्यशाला की कमान डॉ. राघव उपाध्याय के हाथों में थी। उन्होंने मंच से उपस्थित शिक्षाविदों को व्यावहारिक उदाहरणों के जरिए समझाया कि कैसे स्मार्ट क्लासरूम, व्यक्तिगत शिक्षण (पर्सनलाइज्ड लर्निंग), एआई-सहायता प्राप्त प्रशासनिक कार्य और डेटा-आधारित शैक्षिक नियोजन को स्कूलों में लागू किया जा सकता है।
कार्यशाला के दौरान स्कूल प्रमुखों के बीच एआई को लेकर जबरदस्त उत्सुकता देखने को मिली। उपस्थित प्रधानाचार्यों ने अपने-अपने विद्यालयों में एआई टूल्स को लागू करने के व्यावहारिक तरीकों, शिक्षकों को इसके लिए प्रशिक्षित करने की प्रक्रियाओं और छात्रों को एआई-युग के अनुकूल तैयार करने को लेकर डॉ. उपाध्याय से कई महत्वपूर्ण सवाल पूछे। कार्यक्रम में शामिल हुए कई शिक्षाविदों के लिए यह बिल्कुल पहला और अनोखा अनुभव था, जब उन्होंने एआई को महज एक तकनीकी शब्द न मानकर स्कूल प्रबंधन के एक जरूरी और व्यावहारिक उपकरण के रूप में बारीकी से समझा।
डीबीएस ग्लोबल यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. संजय जसोला ने इस मौके पर राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कार्यक्रम में पहुंचे सभी प्रधानाचार्य और शिक्षक सिर्फ अध्यापक नहीं, बल्कि देश के भविष्य का निर्माण करने वाले राष्ट्र-निर्माता हैं। डॉ. जसोला ने जोर देकर कहा कि मौजूदा दौर में शिक्षा प्रणाली के भीतर एआई का समावेश अब कोई वैकल्पिक विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह समय की सबसे बड़ी अनिवार्यता बन चुका है। उन्होंने विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि आज का दिन भारत के हर प्रधानाचार्य को एआई तकनीक से सक्षम बनाने के सफर की एक बड़ी शुरुआत है।
कार्यक्रम को सफल बनाने में विश्वविद्यालय के कई वरिष्ठ शिक्षाविदों और प्रशासनिक अधिकारियों ने भी सक्रिय योगदान दिया। मंच पर प्रो-वाइस चांसलर डॉ. राजीव भारद्वाज, डॉ. मनीष प्रतीक और एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. नवजोत सिंह सहित संस्थान के अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे, जिन्होंने देश भर से आए अतिथियों और प्रधानाचार्यों के साथ संवाद स्थापित किया।
नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडिपेंडेंट स्कूल्स और AIPA के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. नवदीप भारद्वाज ने सम्मानित हो रहे शिक्षकों का हौसला बढ़ाया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि जब हम किसी एक प्रधानाचार्य को सम्मानित करते हैं, तो वास्तव में हम उन हजारों छात्र-छात्राओं के भविष्य को सम्मान दे रहे होते हैं जिनका जीवन उस शिक्षक के मार्गदर्शन में संवरता है। उन्होंने इस आयोजन के तहत हुई एआई कार्यशाला को भारतीय शिक्षा व्यवस्था के एक उज्जवल और आधुनिक भविष्य की सच्ची झलक करार दिया।
उत्तराखंड की गौरवशाली विरासत का जिक्र करते हुए AIPA के राज्य अध्यक्ष डॉ. अमित सहगल ने भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की धरती हमेशा से ज्ञान और चेतना की भूमि रही है। इस परिसर में मौजूद प्रधानाचार्य देश के लाखों परिवारों की उम्मीदों और सपनों के सच्चे वाहक हैं। डॉ. सहगल ने सभी शिक्षकों से इस बदलाव को सहर्ष अपनाने की अपील की ताकि वे अपने विद्यालयों को पूरे आत्मविश्वास के साथ भविष्य की ओर ले जा सकें।
समारोह के दौरान अपने विचार व्यक्त करते हुए अध्यक्ष श्री मोहित अग्रवाल ने बुनियादी ढांचे के विकास में शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शिक्षा किसी भी मजबूत राष्ट्र के निर्माण के लिए सबसे शक्तिशाली और प्राथमिक बुनियादी ढांचा है। अग्रवाल ने प्रत्येक पुरस्कार विजेता प्रधानाचार्य को बधाई देते हुए कहा कि हर एक सफल संस्थान के पीछे एक समर्पित स्कूल प्रमुख की दिन-रात की मेहनत छिपी होती है, जो सैकड़ों बच्चों की तकदीर गढ़ता है। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि इस स्तर के गरिमामयी आयोजनों को अब एक राष्ट्रीय परंपरा का रूप ले लेना चाहिए।
इस पूरे प्रिंसिपल कॉन्क्लेव के दौरान विभिन्न शैक्षणिक सत्रों में छात्र-केंद्रित शिक्षा, डिजिटल रूपांतरण (डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन) और समावेशी शिक्षा जैसे अत्यंत संवेदनशील और समसामयिक विषयों पर बेहद जीवंत और सार्थक चर्चाएं दर्ज की गईं। पूरे देश के शिक्षा क्षेत्र को नई दिशा दिखाने वाला यह महत्वपूर्ण कार्यक्रम डीप कनेक्शन के विशेष सहयोग के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
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