देहरादून : क्लस्टर स्कूलों के निर्माण में आएगी तेजी, नाबार्ड से फंड जुटाएगी सरकार
देहरादून। उत्तराखंड के सरकारी स्कूलों की सूरत बदलने और शिक्षा व्यवस्था को अधिक किफायती बनाने के लिए मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने कमर कस ली है। सचिवालय में आयोजित शिक्षा विभाग की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रदेश के हर शासकीय विद्यालय में बुनियादी सुविधाएं विश्वस्तरीय होनी चाहिए।
बैठक में मुख्य सचिव ने ‘बुक बैंक’ की अवधारणा को अनिवार्य रूप से लागू करने के निर्देश सचिव शिक्षा को दिए। इस योजना के तहत छात्र अपनी कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद पुरानी किताबें स्कूल के बुक बैंक में जमा करेंगे, जिन्हें अगले सत्र के नए छात्रों को आवंटित किया जाएगा। केवल खराब हो चुकी किताबों या नई मांग के आधार पर ही नई पुस्तकों की छपाई की जाएगी, जिससे सरकार के करोड़ों रुपये बचेंगे।
क्लस्टर विद्यालयों के बुनियादी ढांचे को लेकर मुख्य सचिव ने सख्त रुख अपनाते हुए कक्षा कक्षों और हॉस्टल निर्माण कार्यों में गति लाने को कहा है। इन निर्माण कार्यों के लिए बजट की कमी न हो, इसके लिए उन्होंने नाबार्ड (NABARD) से फंडिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
स्कूलों में स्वच्छता और बुनियादी सुविधाओं पर जोर देते हुए मुख्य सचिव ने बिजली, पानी और शौचालयों की उपलब्धता को अनिवार्य बताया। उन्होंने कहा कि शौचालयों की साफ-सफाई के लिए केवल निर्देश काफी नहीं हैं, बल्कि इसके लिए एक स्थायी मैकेनिज्म तैयार किया जाए। सफाई व्यवस्था सुचारू रहे, इसके लिए विभाग को अलग से विशेष फंडिंग का प्रावधान करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
शिक्षा के आधुनिकीकरण के लिए मुख्य सचिव ने डिजिटल पुस्तकालयों (Digital Libraries) की स्थापना पर भी विशेष बल दिया। उनका मानना है कि डिजिटल एक्सेस होने से छात्रों को सीमित संसाधनों के बजाय असीमित ज्ञान और वैश्विक स्तर की पुस्तकों तक पहुंच मिलेगी।
गौरतलब है कि उत्तराखंड में वर्तमान में लगभग 650 से अधिक स्कूलों को क्लस्टर मॉडल पर विकसित करने की योजना है, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों को एक ही छत के नीचे बेहतरीन शिक्षा मिल सके।
इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में सचिव रविनाथ रमन, माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. मुकुल कुमार सती समेत विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
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