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चारधाम यात्रियों के लिए बड़ी खबर : अब ‘दिव्य’ होगा बद्रीनाथ का अनुभव, मास्टर प्लान की डेडलाइन तय

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बदल रहा है भू-वैकुंठ : बद्रीनाथ में रामायण और महाभारत काल की दिखेगी झलक, सरकार की बड़ी तैयारी

देहरादून (ब्यूरो)। उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम को अब केवल एक तीर्थ स्थल के रूप में ही नहीं, बल्कि भारत के पहले ‘आध्यात्मिक स्मार्ट हिल टाउन’ के रूप में नई पहचान मिलने जा रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में पर्यटन विभाग के आला अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक कर इस महत्वाकांक्षी मास्टर प्लान की प्रगति की समीक्षा की। सरकार का लक्ष्य बद्रीनाथ में आधुनिक सुविधाओं और सनातन आध्यात्मिकता का एक ऐसा अनूठा संगम बनाना है, जो आने वाले दशकों के लिए एक मिसाल बने।

इस परियोजना के तहत श्रद्धालुओं के लिए ‘देव दर्शनी पॉइंट’ को सबसे खास बनाया जा रहा है। यहां से यात्री जैसे ही धाम की सीमा में प्रवेश करेंगे, उन्हें बद्रीनाथ मंदिर के पहले भव्य और दिव्य दर्शन होंगे। वहीं, बद्रीनारायण चौक को एक वृहद सांस्कृतिक केंद्र के तौर पर विकसित किया जा रहा है, जो सार्वजनिक समारोहों और आध्यात्मिक संवाद का मुख्य अड्डा बनेगा।

अप्रैल 2026 तक पूरा होगा मिशन

ग्राउंड रिपोर्ट और सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, बद्रीनाथ और केदारनाथ के मास्टर प्लान को अप्रैल 2026 तक पूर्ण करने की समयसीमा तय की गई है। इस साल 23 अप्रैल को मंदिर के कपाट खुलने के साथ ही श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। अब तक 17 लाख से अधिक तीर्थयात्री पंजीकरण करा चुके हैं, जिसे देखते हुए प्रशासन निर्माण कार्यों में तेजी ला रहा है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि निर्माण की गुणवत्ता से कोई समझौता न हो और स्थानीय संस्कृति की महक हर ईंट में झलकनी चाहिए।

मास्टर प्लान में भगवान विष्णु के आयुधों और प्रतीकों को प्रमुखता दी गई है। मंदिर परिसर और आसपास पाञ्चजन्य शंख, कौमोदकी गदा, सुदर्शन चक्र और वैकुंठ द्वार जैसी विशाल कलाकृतियां स्थापित की जाएंगी। ये संरचनाएं न केवल धार्मिक आस्था को मजबूती देंगी, बल्कि पर्यटकों के लिए सेल्फी पॉइंट और आकर्षण का केंद्र भी बनेंगी। इसके अलावा, शेषनेत्र और पंच तत्व थीम पर आधारित निर्माण कार्य भारतीय दर्शन की गहराई को जीवंत करेंगे।

नदी तट और कला का संगम

बद्रीनाथ की आईएसबीटी वॉल पर स्थानीय कुमाऊंनी और गढ़वाली कला के साथ-साथ धार्मिक विषयों पर आधारित भित्ति चित्र उकेरे जा रहे हैं। अलकनंदा रिवरफ्रंट के दूसरे चरण का काम भी जोरों पर है, जिसमें वसुधा वाटिका जैसे आकर्षक लैंडस्केप तैयार किए जाएंगे। यहां प्रकृति और आध्यात्मिकता को एक साथ महसूस किया जा सकेगा। रामायण और महाभारत कालीन प्रतीकों को भी योजना में शामिल किया गया है, ताकि आने वाली पीढ़ी अपने गौरवशाली इतिहास से रूबरू हो सके।

बैठक में सचिव पर्यटन धीरज गर्ब्याल ने बताया कि दिया आरती स्थल को इस तरह विकसित किया जा रहा है कि शाम की आरती यात्रियों के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव बन जाए। पूरे क्षेत्र में ‘स्ट्रीटस्कैप’ का विकास होगा, जिसमें पैदल यात्रियों के लिए सुगम मार्ग, आधुनिक प्रकाश व्यवस्था और पर्यावरण के अनुकूल बैठने की व्यवस्था शामिल है। इस बैठक में सचिव शैलेश बगोली और अपर सचिव बंशीधर तिवारी समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जिन्हें सीएम ने पर्यावरण संरक्षण का विशेष ध्यान रखने की हिदायत दी है।

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