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अंकिता भंडारी केस : सीबीआई जांच के आदेश पर कांग्रेस का हमला

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गरिमा दसौनी बोलीं — ‘यह न्याय नहीं, जांच भटकाने की साजिश है’

देहरादून : अंकिता भंडारी हत्याकांड में उत्तराखंड सरकार के पद्मश्री अनिल जोशी की FIR के आधार पर CBI जांच के आदेश को कांग्रेस नेत्री गरिमा मेहरा दसौनी ने ‘न्याय भटकाने की साजिश’ करार दिया है। गरिमा ने कहा कि यह कदम असली मुद्दे से ध्यान हटाने और पीड़ित परिवार को दरकिनार करने का प्रयास है।

उत्तराखंड कांग्रेस की प्रदेश प्रवक्ता गरिमा दसौनी ने प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा, “यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि जघन्य हत्याकांड में बेटी की जान गई, लेकिन सरकार ने पीड़ित परिवार को ही जांच प्रक्रिया से बाहर रखा। अंकिता के माता-पिता ने खुद मुख्यमंत्री को लिखित शिकायत दी, फिर उनकी तहरीर पर CBI जांच क्यों नहीं?” उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सरकार पीड़ितों की आवाज से घबरा रही है या उन ताकतों को बचाने का प्रयास कर रही है, जिनके नाम मामले में बार-बार सामने आते रहे हैं।

गरिमा के अनुसार, न्याय प्रक्रिया में पीड़ित परिवार का पहला अधिकार होता है, लेकिन सरकार ने उन्हें हाशिए पर धकेल दिया, जिससे जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने चार सूत्री मांग रखीं, पहली मांग में CBI जांच पीड़ित परिवार की तहरीर पर आधारित हो। दूसरी मांग अंकिता के माता-पिता को जांच में पक्षकार बनाया जाए। तीसरी मांग जांच सिटिंग जज की निगरानी में चले। चौथी और अंतिम मांग ये रखी गई की दोषियों को बचाने की साजिश की उच्चस्तरीय जांच हो।

गरिमा दसौनी ने चेतावनी दी कि अगर सरकार न्याय चाहती है, तो पीड़ित परिवार के साथ खड़ी हो, न कि उनके अधिकारों को कुचले। उन्होंने कहा, “अंकिता को न्याय दिलाने की लड़ाई में उत्तराखंड की जनता चुप नहीं बैठेगी।”

इस मामले ने राज्य की राजनीति को गरमा दिया है, जहां विपक्ष लगातार सरकार पर निष्पक्ष जांच में बाधा डालने का आरोप लगा रहा है।

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