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उत्तराखंड CM की पहल, देहरादून में आंगनबाड़ी केंद्र अब बन गए हैं आधुनिक प्ले स्कूल

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उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में बच्चों के शुरुआती विकास को मजबूत बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव हो रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अगुवाई में जिला प्रशासन ने ग्रामीण इलाकों में फैले आंगनबाड़ी केंद्रों को आधुनिक प्ले स्कूल में बदल दिया है।

यह कदम न सिर्फ बच्चों को बेहतर शिक्षा और मनोरंजन देगा, बल्कि उनके स्वास्थ्य और पोषण पर भी ध्यान केंद्रित करेगा। आंगनबाड़ी केंद्र भारत सरकार की एकीकृत बाल विकास योजना का हिस्सा हैं, जो गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों को पोषण, स्वास्थ्य जांच और प्रारंभिक शिक्षा प्रदान करते हैं। अब इन केंद्रों को अपग्रेड करके, देहरादून प्रशासन ने उन्हें ऐसे स्थान में बदल दिया है जहां बच्चे खेल-खेल में सीख सकें।

प्रोजेक्ट की शुरुआत और कार्यान्वयन

यह परिवर्तन 2024-25 की जिला योजना के तहत शुरू हुआ, जिसमें कुल 54 आंगनबाड़ी केंद्रों को चुना गया। लघु सिंचाई विभाग ने इस काम की जिम्मेदारी संभाली और केंद्रों की मरम्मत से लेकर आधुनिक सुविधाएं जोड़ने तक सब कुछ संभाला। जिलाधिकारी सविन बंसल और मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह की देखरेख में यह प्रोजेक्ट पूरा हुआ।

विभिन्न ब्लॉकों में ये केंद्र फैले हैं, जैसे चकराता में सबसे ज्यादा 24, जबकि डोईवाला में 8, कालसी और विकासनगर में 8-8, सहसपुर में 4 और रायपुर में 2। इन बदलावों से बच्चों को एक सुरक्षित और आकर्षक माहौल मिल रहा है, जो उनके मानसिक और शारीरिक विकास को बढ़ावा देगा।

आधुनिक सुविधाओं का जादू

इन केंद्रों में अब स्मार्ट टीवी लगाए गए हैं, जिनके जरिए बच्चे इंटरएक्टिव कंटेंट देखकर सीख सकते हैं। दीवारों पर रंग-बिरंगे चित्र बनाए गए हैं, जो बच्चों की कल्पना को उड़ान देते हैं। इसके अलावा, रंगीन कार्पेट, प्लास्टिक कुर्सियां, गोल मेजें और विभिन्न खिलौने उपलब्ध हैं, जो खेलते हुए सीखने को मजेदार बनाते हैं।

स्वच्छता पर विशेष जोर दिया गया है – पीने का साफ पानी, शौचालय और बिजली की व्यवस्था हर केंद्र में है। साथ ही, भोजन माताएं नियमित रूप से पौष्टिक भोजन प्रदान कर रही हैं। ये सुविधाएं न सिर्फ बच्चों को आकर्षित करती हैं, बल्कि माता-पिता को भी आश्वस्त करती हैं कि उनके बच्चे सही हाथों में हैं।

बच्चों और समुदाय पर प्रभाव

इस पहल से ग्रामीण इलाकों के बच्चों को शहरों जैसी सुविधाएं मिल रही हैं, जो उनके शुरुआती वर्षों में महत्वपूर्ण हैं। अध्ययनों से पता चलता है कि प्रारंभिक शिक्षा बच्चों की भविष्य की सफलता की नींव रखती है – भारत में लगभग 40% बच्चे कुपोषण से प्रभावित हैं, और ऐसे केंद्र इस समस्या से लड़ने में मदद करते हैं।

माता-पिता इस बदलाव से खुश हैं और इसे बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक सकारात्मक कदम मानते हैं। प्रशासन की यह सोच न सिर्फ स्थानीय स्तर पर असर डाल रही है, बल्कि राज्य स्तर पर बाल विकास की नई मिसाल कायम कर रही है।

आगे की योजनाएं और उम्मीदें

देहरादून प्रशासन का लक्ष्य और बड़ा है। 2025-26 में 150 से ज्यादा आंगनबाड़ी केंद्रों को इसी तरह अपग्रेड करने की तैयारी है। लघु सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता विनय कुमार सिंह ने बताया कि चकराता जैसे दूरदराज इलाकों में काम तेजी से चल रहा है, जहां कोटा-तपलाड़, धारौपुडिया जैसे केंद्रों का नवीनीकरण अंतिम चरण में है।

जिला कार्यक्रम अधिकारी जितेंद्र कुमार ने जोर दिया कि यह सिर्फ मरम्मत तक सीमित नहीं है, बल्कि स्मार्ट लर्निंग सामग्री भी शामिल की गई है। मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह के अनुसार, ये प्रयास बच्चों को समान अवसर प्रदान करने की दिशा में हैं, जो उत्तराखंड के विकास मॉडल का हिस्सा बनेंगे। यह पहल राज्य में बाल कल्याण को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकती है, जहां हर बच्चा गुणवत्तापूर्ण शुरुआत पा सके।

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