देहरादून, उत्तराखंड : उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राजधानी के डालनवाला थाने का अचानक दौरा किया। इस दौरान थाने के प्रभारी अधिकारी ड्यूटी पर मौजूद नहीं मिले, जिससे नाराज होकर मुख्यमंत्री ने उन्हें फौरन लाइन हाजिर करने के आदेश दे दिए।
यह दौरा कई आधिकारिक बैठकों के बाद हुआ, जब मुख्यमंत्री अचानक थाने पहुंच गए। इससे पुलिस विभाग में खासी हलचल मच गई और थाने की असल कार्यशैली सबके सामने आ गई। मुख्यमंत्री ने थाने के हर हिस्से को बारीकी से देखा और व्यवस्थाओं की पड़ताल की।
शिकायतकर्ताओं से सीधी बातचीत
मुख्यमंत्री ने थाने में मौजूद कई लोगों से व्यक्तिगत रूप से बात की, जो अपनी समस्याओं के समाधान के लिए आए थे। उन्होंने उनकी शिकायतें ध्यान से सुनीं और पुलिस कर्मियों को साफ निर्देश दिए कि हर शिकायत को गंभीरता से लिया जाए। इसे सिर्फ कागजी कार्रवाई नहीं, बल्कि अपनी जिम्मेदारी समझकर निपटाया जाए। साथ ही, निष्पक्ष और जल्दी कार्रवाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
महिला सुरक्षा पर विशेष ध्यान
थाने में बनी महिला हेल्प डेस्क पर भी मुख्यमंत्री रुके। वहां मौजूद महिलाओं से उन्होंने उनकी परेशानियों के बारे में पूछा। महिला संबंधी मामलों में संवेदनशीलता बनाए रखने, गोपनीयता का ध्यान रखने और तुरंत एक्शन लेने की हिदायत दी। किसी भी तरह की ढील पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई।
रजिस्टर और जेल की स्थिति का जायजा
मुख्यमंत्री ने एफआईआर रजिस्टर को विस्तार से देखा। दर्ज मामलों पर क्या कार्रवाई हुई, फॉलो-अप कैसे हो रहा है और लंबित केसों की स्थिति क्या है, यह सब जाना। ड्यूटी और उपस्थिति रजिस्टर की भी जांच की, ताकि हर कर्मचारी की जवाबदेही तय हो सके।
थाने की लॉकअप में गंदगी और अव्यवस्था देखकर वे काफी नाराज हुए। तुरंत साफ-सफाई कराने और मानकों के मुताबिक व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए। उनका कहना था कि थाने की हालत ही पूरे प्रशासन की कार्य संस्कृति को दिखाती है।
अपराध नियंत्रण और ट्रैफिक पर सख्ती
वाहन चेकिंग अभियान, वेरिफिकेशन ड्राइव और अपराध रोकने के चल रहे प्रयासों की समीक्षा की गई। इनमें किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं करने की बात कही। क्षेत्र में ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर असंतोष जताते हुए विस्तृत जांच और जिम्मेदारी तय करने के आदेश दिए।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक तुरंत थाने पहुंचे और स्थिति का मुआयना कर अनुशासनात्मक कदम शुरू किए।
अंत में मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि कानून-व्यवस्था से जुड़े हर अधिकारी और कर्मचारी जनता के प्रति जवाबदेह हैं। जनसेवा में कोई लापरवाही, अनुशासनहीनता या असंवेदनशीलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पुलिस व्यवस्था में सुधार, पारदर्शिता और जवाबदेही सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। जनहित के लिए जरूरत पड़ी तो सबसे सख्त कार्रवाई से भी पीछे नहीं हटेंगे।
यह कदम राज्य में पुलिसिंग को और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संदेश देता है, जहां जनता को बेहतर और जवाबदेह सेवा मिल सके।
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