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Viksit Bharat Ji Ram Ji Yojana : कांग्रेस को राम नाम से दिक्कत, योजना से नहीं – महेंद्र भट्ट का आरोप

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Viksit Bharat Ji Ram Ji Yojana : उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से एक महत्वपूर्ण राजनीतिक बयान आया है, जहां भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने केंद्र सरकार की नई ग्रामीण रोजगार योजना की सराहना की।

यह योजना, जिसे विकसित भारत – जी राम जी योजना के नाम से जाना जा रहा है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के विजन का हिस्सा है। भट्ट ने इसे ग्रामीण भारत के लिए एक क्रांतिकारी बदलाव बताया, जो बुनियादी ढांचे और रोजगार के अवसरों को मजबूत करेगा।

ग्रामीण भारत में बदलाव की कहानी: पुरानी योजना से नई दिशा तक

भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में रोजगार की गारंटी देने वाली महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) 2005 में शुरू हुई थी। यह योजना संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार के समय आई और इसका उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को साल में 100 दिन का रोजगार उपलब्ध कराना था। पिछले दो दशकों में इसने करोड़ों लोगों को सहारा दिया, खासकर महामारी के दौरान जब 2020-21 में इसका बजट 1.11 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया।

लेकिन अब, समय के साथ बदलाव की जरूरत महसूस की जा रही है। नई योजना इसे पूरी तरह डिजिटल और आधुनिक रूप देने का प्रयास है, जिसमें रोजगार के दिनों को 100 से बढ़ाकर 125 कर दिया गया है।

योजना की मुख्य विशेषताएं: जल, बुनियादी ढांचा और आपदा सुरक्षा पर फोकस

इस नई पहल में जल संरक्षण, ग्रामीण सड़कें, पुल और अन्य बुनियादी सुविधाओं को प्राथमिकता दी गई है। प्राकृतिक आपदाओं से बचाव और आजीविका से जुड़े कामों को भी शामिल किया गया है। प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना से जोड़कर इसे अधिक कुशल और भ्रष्टाचार-मुक्त बनाने की कोशिश की गई है।

डिजिटल टूल्स का इस्तेमाल करके कार्यों की निगरानी होगी, जैसे साप्ताहिक मूल्यांकन और बायोमेट्रिक सिस्टम से भुगतान। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और काम की गति तेज होगी। साथ ही, फसल के व्यस्त मौसम में 60 दिनों की छूट दी गई है, ताकि किसानों को मजदूरों की कमी न हो और साल भर रोजगार के अवसर बढ़ें।

बजट और फंडिंग में सुधार: राज्यों की भूमिका और उत्तराखंड का लाभ

केंद्र सरकार ने योजना के लिए बजट को बढ़ाकर करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये कर दिया है, जो पहले के मुकाबले काफी ज्यादा है। कांग्रेस शासन में यह बजट कभी 30 हजार करोड़ से ऊपर नहीं गया, लेकिन अब 70 हजार करोड़ से अधिक की राशि उपलब्ध है। नई व्यवस्था में केंद्र और राज्य का अनुपात 60:40 रखा गया है, लेकिन उत्तराखंड जैसे हिमालयी राज्यों के लिए यह 90:10 ही रहेगा, यानी केंद्र 90 प्रतिशत फंड देगा।

इससे ग्रामीण विकास में तेजी आएगी। हाल के आंकड़ों से पता चलता है कि 2023-24 में मनरेगा ने 309 करोड़ व्यक्ति-दिन रोजगार दिए, जो औसतन 60 मिलियन परिवारों के लिए 50 दिन का काम था। नई योजना से यह संख्या और बढ़ सकती है।

विपक्ष की आलोचना और भाजपा का जवाब: नाम बदलाव पर बहस

विपक्ष, खासकर कांग्रेस, ने योजना के नाम से महात्मा गांधी का नाम हटाने पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि यह गांधीजी के योगदान को कम आंकना है। लेकिन महेंद्र भट्ट ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी गांधीजी के सिद्धांतों को जमीन पर उतार रहे हैं, जैसे ग्राम स्वराज, खादी को बढ़ावा और स्वदेशी का समर्थन।

उन्होंने याद दिलाया कि गांधीजी खुद राम भजन गाते थे और उनकी समाधि पर ‘हे राम’ लिखा है। भट्ट का तर्क है कि कांग्रेस को ‘राम’ नाम से समस्या है, जबकि योजना का फोकस काम पर है, नाम पर नहीं। पहले भी योजना का नाम जवाहरलाल नेहरू से बदलकर मनरेगा किया गया था, तो क्या तब नेहरूजी का अपमान हुआ?

भविष्य की संभावनाएं: विकसित भारत 2047 की ओर

यह योजना ग्रामीण भारत को मजबूत बनाने का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो 2047 के विकसित भारत लक्ष्य को हासिल करने में मदद करेगी। हाल के सर्वे में 23 राज्यों में पुरानी योजना में अनियमितताएं पाई गईं, खासकर पश्चिम बंगाल में। नई व्यवस्था से ऐसी समस्याओं पर काबू पाया जा सकेगा। कुल मिलाकर, यह बदलाव ग्रामीण परिवारों को अधिक रोजगार, बेहतर सुविधाएं और पारदर्शी सिस्टम देगा, जो देश की प्रगति की नींव मजबूत करेगा।

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