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Dehradun : हरदा की माल्टा पार्टी पर भट्ट का तंज, बोले कांग्रेस में रस नहीं बचा

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Dehradun : उत्तराखंड की सर्द हवाओं में राजनीतिक गर्मी बढ़ रही है। देहरादून से आ रही खबरों के मुताबिक, भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस की एक अनोखी पहल पर करारा हमला बोला है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, जिन्हें प्यार से ‘हरदा’ कहा जाता है, ने हाल ही में एक माल्टा पार्टी का आयोजन किया था।

यह कार्यक्रम स्थानीय किसानों और फलों की खेती को बढ़ावा देने का दावा करता था, लेकिन भाजपा इसे मात्र एक दिखावा मान रही है। राज्यसभा सांसद और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने इस पर चुटकी लेते हुए कहा कि कांग्रेस के ऐसे प्रयासों में अब कोई रस नहीं बचा है।

कांग्रेस की रणनीति पर सवाल

भट्ट की टिप्पणी राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गई है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस आजकल जमीनी मुद्दों से दूर होकर सोशल मीडिया पर ज्यादा सक्रिय नजर आती है। विपक्ष के रूप में कांग्रेस के पास अब कोई ठोस विचार या एजेंडा नहीं बचा है। इसका कारण उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार की उपलब्धियों को बताया।

धामी सरकार ने शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में कई कदम उठाए हैं, जिससे जनता का विश्वास मजबूत हुआ है। उदाहरण के लिए, उत्तराखंड में पिछले कुछ वर्षों में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए नई सड़कें और होमस्टे योजनाएं शुरू की गई हैं, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रही हैं।

माल्टा पार्टी का पृष्ठभूमि संदर्भ

माल्टा, जो उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में उगाया जाने वाला एक लोकप्रिय फल है, राजनीति में प्रतीक बन गया है। हरीश रावत की माल्टा पार्टी का उद्देश्य किसानों की समस्याओं पर ध्यान खींचना था, लेकिन भट्ट ने इसे व्यंग्यात्मक अंदाज में खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेता अब जनहित के मुद्दों पर बोलने से कतराते हैं और फलों जैसे हल्के-फुल्के विषयों पर ही फोकस करते हैं।

रावत, जो 2013 से 2017 तक मुख्यमंत्री रहे, अक्सर ऐसे अनोखे कार्यक्रमों के लिए जाने जाते हैं। लेकिन भाजपा का मानना है कि ये सिर्फ मीडिया का ध्यान आकर्षित करने के तरीके हैं, जिनमें कोई गहराई नहीं है।

भ्रष्टाचार के पुराने आरोपों का जिक्र

भट्ट ने बात को और गहरा करते हुए कांग्रेस के पुराने दिनों की याद दिलाई। उन्होंने इशारों में कहा कि जब कांग्रेस सत्ता में थी, तब उनके नेता विकास के बजाय व्यक्तिगत लाभ पर ज्यादा ध्यान देते थे। यहां ‘डेनिस’ जैसे शराब ब्रांड का जिक्र करते हुए उन्होंने व्यंग्य किया कि माल्टा से रस निकालने की बजाय, कांग्रेस वाले इसे गलत दिशा में इस्तेमाल करते रहे हैं।

उत्तराखंड में 2017 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की हार को याद करते हुए भट्ट ने कहा कि 2027 के चुनावों में भी यही हाल होगा। उस चुनाव में भाजपा ने 70 में से 57 सीटें जीती थीं, जबकि कांग्रेस सिर्फ 11 पर सिमट गई थी। यह आंकड़े बताते हैं कि जनता अब विकास की मिठास का स्वाद चख रही है, न कि हार की कड़वाहट का।

भविष्य की राजनीतिक चुनौतियां

उत्तराखंड की राजनीति में ऐसे व्यंग्य आम हैं, लेकिन ये राज्य के विकास पर असर डालते हैं। भाजपा का दावा है कि उनकी सरकार ने बेरोजगारी को कम करने के लिए स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम चलाए हैं, जिनसे हजारों युवाओं को रोजगार मिला है। वहीं, कांग्रेस को अब नए मुद्दे तलाशने होंगे।

भट्ट का सुझाव था कि कांग्रेस को ज्यादा प्रयास करने की बजाय अपनी कमजोरियों पर काम करना चाहिए, वरना परिणाम फिर वही होंगे। यह विवाद बताता है कि उत्तराखंड में फलों की खेती से लेकर राजनीतिक रणनीतियों तक, हर चीज में प्रतिस्पर्धा है, लेकिन अंत में जनता की भलाई ही जीतती है।

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