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देहरादून : संडे मार्केट ने तोड़ दी पलटन बाज़ार की कमर, व्यापारी सड़क पर उतरने को तैयार

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देहरादून : देहरादून के पलटन बाज़ार, अंसारी मार्ग और आसपास के इलाक़ों के सैकड़ों दुकानदार पिछले कई महीनों से एक ही बात को लेकर परेशान हैं – हर रविवार को रेंजर्स ग्राउंड में लगने वाला विशाल फड़ बाज़ार। उनका कहना है कि यह बाज़ार उनकी रोज़ी-रोटी पर सीधा हमला है।

बाहर के व्यापारी, बिना बिल का माल, टैक्स चोरी

व्यापारियों का दावा है कि इस संडे मार्केट में 90% से ज़्यादा स्टॉल बाहर के लोग लगाते हैं। ये लोग शुक्रवार-शनिवार को माल लेकर आते हैं, रविवार को बेचते हैं और शाम तक वापस चले जाते हैं। सबसे बड़ी शिकायत यह है कि यहाँ बिकने वाला कपड़ा, जूते-चप्पल, खिलौने, कॉस्मेटिक्स आदि ज्यादातर बिना GST बिल के आता है। नतीजा? ग्राहक को 20-30% सस्ता मिल जाता है, लेकिन स्थानीय दुकानदार, जो हर महीने GST, शॉप एक्ट लाइसेंस, बिजली बिल जैसे तमाम टैक्स देते हैं, सीधे मुकाबले में नहीं टिक पाते।

तीन रविवार बंद रहा बाज़ार, पलटन बाज़ार फिर चमका

व्यापारी बताते हैं कि पिछले तीन रविवार जब किसी कारणवश यह संडे मार्केट नहीं लगा, तो पलटन बाज़ार में पुरानी रौनक लौट आई। एक दुकानदार ने बताया, “भैया, 8-10 साल बाद ऐसा लगा कि हमारा बाज़ार फिर से जीवित हो गया। ग्राहक आराम से घूम रहे थे, पार्किंग मिल रही थी और बिक्री भी 40-50% तक बढ़ गई।”

पार्किंग का बुरा हाल, स्थानीय लोग भी नाराज़

संडे मार्केट लगते ही नहीं, आसपास की सड़कें जाम हो जाती हैं। कोई पार्किंग व्यवस्था नहीं होने से लोग गाड़ियाँ मुख्य सड़क पर ही खड़ी कर देते हैं। नतीजतन, पलटन बाज़ार आने वाले नियमित ग्राहक भी परेशान होकर लौट जाते हैं। अब तो स्थानीय निवासी भी इस बाज़ार के ख़िलाफ़ हो गए हैं।

व्यापार मंडल ने दी चेतावनी

30 नवंबर 2025 को दून वैली महानगर उद्योग व्यापार मंडल के मुख्यालय पर हुई बैठक में सैकड़ों व्यापारियों ने एक स्वर में माँग की कि इस संडे मार्केट को शहर से कम से कम 4-5 किलोमीटर दूर किसी उपयुक्त जगह शिफ्ट किया जाए, जहाँ पार्किंग, फायर सेफ्टी और अन्य सुविधाएँ हों।
अध्यक्ष पंकज मैसोन ने साफ कहा, “हम अपने व्यापारियों के साथ हर कदम पर खड़े हैं। अगर जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो हमें सड़क पर उतरना पड़ेगा।”

यह मामला सिर्फ़ व्यापारियों का नहीं, सरकार के राजस्व का भी है

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे अनियोजित फड़ बाज़ारों से हर साल सरकार को करोड़ों रुपये का GST राजस्व नुकसान होता है। साथ ही स्थानीय छोटे-मध्यम व्यापारियों का व्यवसाय चौपट होने से रोज़गार पर भी असर पड़ता है।

आगे क्या होगा?

व्यापारी अब प्रशासन से लिखित आश्वासन चाहते हैं। अगर यह बाज़ार शहर के बीचों-बीच लगा रहा तो बहुत जल्द बड़ा आंदोलन हो सकता है।

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