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Dehradun News : दून पुलिस की जाल में फंसा 'नन्हा मियां', जानिए कैसे हो रही थी अवैध ड्रग्स की सप्लाई

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Dehradun News : उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में नशे के काले कारोबार पर दून पुलिस ने एक और जोरदार प्रहार किया है। सहसपुर थाना क्षेत्र में पुलिस ने एक शातिर नशा तस्कर को 26.45 ग्राम अवैध स्मैक के साथ धर दबोचा। इस स्मैक की अनुमानित कीमत करीब 8 लाख रुपये बताई जा रही है।

गिरफ्तार अभियुक्त की पहचान नन्हे मियां (37 वर्ष) के रूप में हुई है, जो मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले का रहने वाला है और वर्तमान में देहरादून के सहसपुर क्षेत्र में रह रहा था। पुलिस के मुताबिक, यह तस्कर बरेली से स्मैक लाकर देहरादून में नशे के आदी लोगों और औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले मजदूरों को बेचने की फिराक में था। 

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के “ड्रग्स फ्री देवभूमि 2025” के विजन को साकार करने के लिए देहरादून पुलिस पूरी तरह से कमर कस चुकी है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) देहरादून ने सभी थानों को नशा तस्करी में लिप्त अपराधियों पर नकेल कसने के सख्त निर्देश दिए हैं। इन्हीं निर्देशों के तहत सहसपुर पुलिस ने 10 मई 2025 को जेबीआईटी के पास सघन चेकिंग अभियान चलाया। इसी दौरान संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर नन्हे मियां को पकड़ा गया। तलाशी लेने पर उसके पास से भारी मात्रा में स्मैक बरामद हुई। 

पूछताछ में अभियुक्त ने बताया कि वह लंबे समय से बरेली से स्मैक खरीदकर देहरादून में सप्लाई कर रहा था। उसका निशाना खास तौर पर वे लोग थे, जो नशे की लत में फंसे हैं या आर्थिक रूप से कमजोर तबके से आते हैं। सहसपुर पुलिस ने उसके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/21 के तहत मामला दर्ज कर लिया है और आगे की जांच शुरू कर दी है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल है। 

इस ऑपरेशन में उप-निरीक्षक जावेद हसन, कांस्टेबल नरेश पंत और कांस्टेबल जितेंद्र की टीम ने अहम भूमिका निभाई। स्थानीय लोगों ने पुलिस की इस कार्रवाई की सराहना की है और उम्मीद जताई है कि नशे के इस जाल से युवाओं को बचाने के लिए ऐसे अभियान लगातार चलते रहेंगे। उत्तराखंड पुलिस का यह कदम न केवल नशा तस्करों के लिए एक चेतावनी है, बल्कि समाज को नशा मुक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास भी है। 

देहरादून पुलिस का कहना है कि नशा तस्करी के खिलाफ उनकी यह लड़ाई तब तक जारी रहेगी, जब तक उत्तराखंड पूरी तरह से नशा मुक्त नहीं हो जाता। नागरिकों से भी अपील की गई है कि वे संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तुरंत पुलिस को दें, ताकि इस सामाजिक बुराई को जड़ से खत्म किया जा सके। 

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