सवर्ण समाज ने भरी हुंकार, कहा- विभेदकारी जातीय कानूनों से सामान्य वर्ग का हो रहा उत्पीड़न
- सवर्ण समाज का समानता सम्मेलन संपन्न जातीय कानूनों में संशोधन की मांग, नहीं तो गृहयुद्ध का खतरा: स्वामी आनन्द स्वरूप
देहरादून, 27 सितंबर। राजधानी देहरादून में उत्तराखंड समानता पार्टी और अखिल भारतीय समानता मंच के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘सवर्ण समानता सम्मेलन’ रविवार को विचार-मंथन के साथ संपन्न हो गया। इस आयोजन में विभिन्न प्रदेशों से पहुंचे बुद्धिजीवियों, पूर्व अधिकारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने वर्तमान जातीय कानूनों और आरक्षण व्यवस्था के व्यावहारिक पहलुओं पर बेबाक राय रखी।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने अनुसूचित जाति/जनजाति (उत्पीड़न निवारण) अधिनियम 1989, यूजीसी के नए दिशा-निर्देशों और पदोन्नति में आरक्षण जैसे विषयों पर गंभीर सवाल उठाए। सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद स्वामी आनंद स्वरूप महाराज ने कहा कि सामाजिक समरसता बनाए रखने के लिए विभेदकारी व्यवस्थाओं में समयबद्ध सुधार आवश्यक है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि समय रहते कानूनी बदलाव नहीं किए गए तो इससे सामाजिक ताने-बाने पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे उत्तराखंड समानता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सीएस नेगी ने स्पष्ट किया कि पार्टी किसी वर्ग विशेष के विरोध में नहीं है, बल्कि प्रशासनिक व कानूनी समानता की पक्षधर है। उन्होंने कहा कि सामान्य वर्ग के हितों के संरक्षण के लिए राज्य व केंद्र स्तर पर सशक्त सवर्ण आयोग का गठन वक्त की मांग है।
अखिल भारतीय समानता मंच के राष्ट्रीय महासचिव वीपी नौटियाल ने ऐतिहासिक ‘एम नागराज बनाम भारत संघ’ मामले का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने ध्यान दिलाया कि इस रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए ही सर्वोच्च न्यायालय ने आरक्षण की अधिकतम सीमा 50 प्रतिशत तय करने का ऐतिहासिक सिद्धांत प्रतिपादित किया था।
नौटियाल के मुताबिक, केवल अदालत में याचिकाएं दायर करने या धरना-प्रदर्शन करने से नीतिगत बदलाव संभव नहीं हैं, इसलिए सवर्ण समाज को अब मुख्यधारा के राजनीतिक प्रतिनिधित्व की दिशा में भी गंभीरता से सोचना होगा।
पूर्व आईपीएस अधिकारी और पूर्व डीआईजी जुगल किशोर तिवारी ने कानूनी प्रक्रियाओं के निष्पक्ष पालन पर बल दिया। वहीं ‘सच संविधान’ पुस्तक के लेखक एडवोकेट पंकज त्रिपाठी ने अवसरवादी राजनीति के मुकाबले एक पारदर्शी सामाजिक-राजनीतिक विकल्प खड़े करने की बात कही।
उत्तराखंड समानता पार्टी के प्रमुख महासचिव एलपी रतूड़ी और संगठन महासचिव श्रीधर प्रसाद नैथानी ने घोषणा की कि इस सम्मेलन के बाद राज्य के सभी 13 जनपदों में चरणबद्ध तरीके से जनजागरण गोष्ठियां आयोजित की जाएंगी।
कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश से देवभूमि पार्टी के अध्यक्ष रूमित ठाकुर, क्षत्रिय चेतना मंच के एडवोकेट रवि नेगी और उत्तर प्रदेश से पंडित त्रिभुवन शर्मा सहित सैकड़ों प्रतिनिधि मौजूद रहे।
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