देहरादून (उत्तराखंड) में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के एक एआई वीडियो ने सियासी भूचाल ला दिया है। हरीश रावत आज दोपहर 1 बजकर 50 मिनट पर गुस्से में नेहरू कॉलोनी थाने पहुंच गए।
उन्होंने पुलिस को एआई जनरेटेड (AI Generated) वीडियो के खिलाफ लिखित शिकायत सौंपी है। आरोप है कि विरोधी पार्टी इस तकनीक का इस्तेमाल कर उन्हें ‘पाकिस्तानी जासूस’ के रूप में पेश कर रही है। थाने से उन्हें शिकायत की रिसीविंग भी मिल गई है।
मामला बेहद गंभीर है। हरीश रावत ने पुलिस को बताया कि वे राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके हैं, लेकिन उत्तराखंड भाजपा उनकी छवि खराब करने के लिए अपनी ऑफिशियल वेबसाइट पर छेड़छाड़ किए गए वीडियो और चित्र प्रसारित कर रही है। उन्होंने इसे अपनी आस्था पर प्रहार बताया। रावत का कहना है कि एआई वीडियो से लोगों में भारी आक्रोश है और भाजपा झूठ व फरेब की राजनीति कर रही है।
हरीश रावत ने पुराने जख्म भी कुरेदे। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे 2017 में भाजपा ने जुमे की नमाज की छुट्टी का झूठ फैलाकर कांग्रेस को नुकसान पहुंचाया था, जिसका कोई सरकारी नोटिफिकेशन आज तक नहीं मिला।
फिर 2022 में मुस्लिम यूनिवर्सिटी बनाने का झूठ परोसा गया। उन्होंने कहा कि न्याय यात्रा निकालकर उन्होंने मुस्लिम यूनिवर्सिटी के सबूत मांगे थे, लेकिन भाजपा खामोश रही। अब एआई का सहारा लेकर एक बार फिर उन्हें बदनाम करने की साजिश रची जा रही है।
प्रधानमंत्री पर भी सीधा हमला बोला गया। हरीश रावत ने कहा कि पीएम मोदी दुनिया भर में एआई के दुरुपयोग को बड़ा खतरा बताते हैं, लेकिन उनके अपने ही राज्य में उनकी पार्टी इसका इस्तेमाल कर एक पूर्व सीएम को ‘पाकिस्तानी जासूस’ बता रही है।
ठाणे में रावत बेहद भावुक हो गए। उन्होंने रुंधे गले से कहा कि देशद्रोही की गाली सुनने से अच्छा होता कि वे मर जाते। अपने 59 साल के बेदाग राजनीतिक जीवन में यह सबसे बड़ा कलंक है, जिसे देखकर वे खून के घूंट पीकर रह गए हैं। इसी आहत मन के साथ उन्हें न्याय के लिए पुलिस की शरण लेनी पड़ी।
उन्होंने भारतीय दंड संहिता, साइबर क्राइम और लोक प्रतिनिधित्व एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। इस दौरान इंडिया गठबंधन के कई नेता भी उनके समर्थन में थाने पहुंचे। इसके तुरंत बाद हरीश रावत साइबर क्राइम दफ्तर में भी शिकायत दर्ज कराने निकल गए।
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