ऋषिकेश और हरिद्वार को जोड़ने वाले व्यस्त राजमार्ग पर एक दुखद हादसे ने चार जिंदगियों को छीन लिया। मंगलवार की रात जब ज्यादातर लोग अपने घरों में आराम कर रहे थे, तभी एक तेज रफ्तार कार और ट्रक की टक्कर ने सबको स्तब्ध कर दिया। इस घटना ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा की जरूरत पर जोर दिया है, जहां भारत में हर साल लाखों लोग सड़क दुर्घटनाओं का शिकार होते हैं।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2023 में देशभर में करीब 1.5 लाख से ज्यादा मौतें सड़क हादसों से हुईं, और उत्तराखंड जैसे पहाड़ी इलाकों में यह समस्या और भी गंभीर है क्योंकि यहां राजमार्गों पर पशु और तेज गति वाले वाहन आम हैं।
हादसे का भयानक मंजर
रात करीब साढ़े दस बजे, हरिद्वार से ऋषिकेश की ओर जा रही एक XUV 500 कार ने कई वाहनों को पीछे छोड़ने की कोशिश की। अचानक सड़क पर एक गाय आ गई, जिसे बचाने के प्रयास में चालक ने गाड़ी को तेजी से मोड़ा। नतीजा यह हुआ कि कार का संतुलन बिगड़ गया और वह सामने से आ रहे ट्रक से टकरा गई।
टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई, और आसपास के लोग दहशत में आ गए। ऐसे हादसों में अक्सर तेज रफ्तार और अप्रत्याशित बाधाएं मुख्य वजह बनती हैं, जो सड़क उपयोगकर्ताओं को सतर्क रहने की याद दिलाती हैं।
राहत कार्य और पुलिस की कार्रवाई
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और आपातकालीन टीमों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति संभाली। कार में सवार लोगों को निकालना बेहद मुश्किल था क्योंकि वाहन बुरी तरह से कुचल चुका था। आखिरकार, क्रेन और कटर की मदद से शवों को बाहर निकाला गया। पुलिस ने पाया कि सभी चारों की मौत मौके पर ही हो चुकी थी। इस तरह के मामलों में त्वरित राहत कार्य जान बचा सकता है, लेकिन यहां देरी का कोई मौका नहीं था। हादसे के कारण राजमार्ग पर कुछ समय के लिए यातायात रुका रहा, जिससे यात्रियों को असुविधा हुई।
मृतकों की पहचान और जांच
पुलिस ने कार के पंजीकरण नंबर से मालिक की जानकारी जुटाई, जो ऋषिकेश के चंदेश्वर मार्ग के निवासी सोनू कुमार निकले। उनके घर जाकर जांच की गई, जहां दो मृतकों की पहचान हो सकी—30 साल के धीरज जायसवाल, जो चंद्रेश्वर नगर के दुर्गा मंदिर रोड पर रहते थे, और 22 साल के हरिओम, जो गुमानी वाला इलाके के हनुमान मंदिर के पास रहते थे।
बाकी दो की पहचान रात भर की कोशिशों के बाद भी नहीं हो पाई। कोतवाली इंस्पेक्टर कैलाश चंद्र भट्ट ने बताया कि जांच जारी है, और यह घटना सड़क पर पशुओं की समस्या को उजागर करती है, जिसके लिए कई राज्य सरकारें अब विशेष उपाय कर रही हैं जैसे फेंसिंग या पशु आश्रय।
सड़क सुरक्षा पर एक नजर
यह हादसा उत्तराखंड के पर्यटन क्षेत्र में सड़क सुरक्षा की चुनौतियों को सामने लाता है। ऋषिकेश और हरिद्वार जैसे धार्मिक स्थलों के बीच यह राजमार्ग साल भर व्यस्त रहता है, जहां तीर्थयात्री और पर्यटक बड़ी संख्या में आते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ओवरटेकिंग के दौरान सावधानी बरतना, गति सीमा का पालन करना और अप्रत्याशित स्थितियों के लिए तैयार रहना जरूरी है।
अगर आप भी ऐसे इलाकों में यात्रा करते हैं, तो हमेशा सीट बेल्ट लगाएं और रात में अतिरिक्त सतर्कता बरतें। इस तरह की घटनाएं हमें याद दिलाती हैं कि जीवन कितना अनमोल है, और छोटी-छोटी लापरवाहियां बड़ी त्रासदी का कारण बन सकती हैं।
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