---Advertisement---

Uttarakhand : हरीश रावत बोले – आज राम, कल लक्ष्मण-हनुमान का नाम हटाएगी BJP

By
Last updated:
Follow Us
Join Our WhatsApp Channel


Uttarakhand : केंद्र सरकार की ओर से महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना, जिसे आमतौर पर मनरेगा कहा जाता है, का नाम बदलने की कवायद ने राजनीतिक हलचल मचा दी है। यह योजना साल 2005 में कांग्रेस नीत यूपीए सरकार के समय शुरू हुई थी, जो ग्रामीण इलाकों में गरीब परिवारों को साल में कम से कम 100 दिन का रोजगार देने का वादा करती है।

अब मोदी सरकार इसे ‘विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ नाम से पुकारने की तैयारी में है, जिसे संक्षिप्त रूप में ‘वीबी-जी राम जी’ कहा जा रहा है। इस बदलाव का मकसद योजना को विकासशील भारत की दृष्टि से जोड़ना बताया जा रहा है, लेकिन विपक्ष इसे महात्मा गांधी के नाम को हटाने की साजिश के रूप में देख रहा है।

योजना की पृष्ठभूमि और महत्व

मनरेगा ने पिछले करीब दो दशकों में करोड़ों ग्रामीण परिवारों की जिंदगी बदली है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2023-24 में इस योजना से 3 अरब से ज्यादा व्यक्ति-दिवस का रोजगार सृजित हुआ, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली। यह योजना न सिर्फ बेरोजगारी से लड़ती है, बल्कि सूखा प्रभावित इलाकों में पानी संरक्षण, सड़क निर्माण और वनरोपण जैसे कामों से स्थानीय विकास को बढ़ावा देती है।

 

नाम बदलने का प्रस्ताव लोकसभा में पेश होने के बाद से ही विवादों में घिर गया है, क्योंकि इसमें गांधी जी का नाम हटाकर योजना की मूल भावना को बदलने का आरोप लग रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे बदलाव ब्रांडिंग का हिस्सा हो सकते हैं, लेकिन वे राजनीतिक संदेश भी देते हैं।

विपक्ष का तीखा हमला

इस मुद्दे पर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल सरकार पर लगातार हमलावर हैं। उन्होंने इसे गांधी जी के योगदान को मिटाने की कोशिश बताया है। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इस पर खासा नाराजगी जताई है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि सरकार की कांग्रेस से नफरत अब गांधी जी तक पहुंच गई है। रावत का कहना है कि महात्मा गांधी श्रीराम के बड़े भक्त थे, लेकिन योजना का नाम बदलकर ‘जी राम जी’ करने से भक्त का नाम हटाना गलत है।

उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि अगर ऐसा ही चला तो बीजेपी आगे राम से जुड़े लक्ष्मण या हनुमान जैसे नामों को भी हटा सकती है। यह बयान उत्तराखंड जैसे राज्यों में भी गूंज रहा है, जहां मनरेगा ग्रामीणों के लिए जीवनरेखा की तरह काम करती है।

संसद में हंगामा और राजनीतिक टकराव

लोकसभा में बिल पेश होते ही विपक्ष ने जोरदार विरोध दर्ज कराया। कांग्रेस ने इसे गांधी जी का अपमान करार दिया और सदन में हंगामा किया। बीजेपी का बचाव है कि नाम बदलने से योजना की प्रभावशीलता बढ़ेगी और इसे आधुनिक भारत की जरूरतों से जोड़ा जाएगा। लेकिन विपक्ष इसे वैचारिक लड़ाई का हिस्सा मान रहा है। इस बहस से साफ है कि मनरेगा जैसी योजनाएं सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि राजनीतिक महत्व भी रखती हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा चुनावी रैलियों में भी गूंज सकता है, खासकर ग्रामीण मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए।

योजना के भविष्य पर सवाल

नाम बदलने से योजना की संरचना में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा, लेकिन यह सवाल उठाता है कि क्या ऐसे कदमों से गरीबों की मदद बढ़ेगी या सिर्फ राजनीतिक लाभ होगा। मनरेगा ने कोरोना महामारी के दौरान लाखों प्रवासी मजदूरों को सहारा दिया था, जब वे शहरों से गांव लौटे थे। अब अगर नाम बदला जाता है, तो क्या इसका बजट और पहुंच बढ़ेगी?

सरकार का दावा है कि ‘विकसित भारत’ विजन के तहत योजना को मजबूत किया जाएगा, लेकिन विपक्ष इसे सिर्फ नाम का खेल बता रहा है। कुल मिलाकर, यह विवाद दिखाता है कि भारत की राजनीति में ऐतिहासिक नाम और योजनाएं कितनी गहराई से जुड़ी हैं।

The post Uttarakhand : हरीश रावत बोले – आज राम, कल लक्ष्मण-हनुमान का नाम हटाएगी BJP appeared first on Devpath.

Leave a Comment