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रुद्रप्रयाग में स्पोर्ट्स स्टेडियम पर बवाल, विधायक आशा नौटियाल दो घंटे घिरीं

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उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में अगस्त्यमुनि इलाके में एक खेल स्टेडियम बनाने की योजना ने स्थानीय लोगों के बीच गहरा विवाद पैदा कर दिया है। यह जगह प्राचीन ऋषि अगस्त्य से जुड़ी हुई मानी जाती है, जहां सदियों से धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व जुड़ा हुआ है।

हाल ही में जब निर्माण कार्य दोबारा शुरू हुआ, तो लोगों का गुस्सा भड़क उठा और उन्होंने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। यह घटना सोमवार को हुई, जब स्थानीय निवासी एक सम्मेलन स्थल पर पहुंचे और वहां मौजूद नेताओं से अपनी बात मनवाने की कोशिश की।

स्थानीय भावनाओं का उबाल

अगस्त्यमुनि का वह मैदान, जहां स्टेडियम बनना प्रस्तावित है, लोगों के लिए सिर्फ एक खाली जगह नहीं है। यह भूमि ऋषि अगस्त्य की तपोभूमि के रूप में जानी जाती है, जहां पौराणिक कथाओं के अनुसार उन्होंने ध्यान और तपस्या की थी। हिंदू धर्म में अगस्त्य ऋषि को ज्ञान और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक माना जाता है, और इस जगह पर हर साल धार्मिक आयोजन होते हैं।

स्थानीय निवासियों का मानना है कि यहां किसी भी तरह का निर्माण उनकी सांस्कृतिक विरासत को नुकसान पहुंचाएगा। विरोध करने वालों में महिलाएं और युवा भी शामिल हैं, जो कहते हैं कि बिना उनकी सहमति के यह काम आगे नहीं बढ़ सकता।

सम्मेलन में हुआ हंगामा

उस दिन गणपति पैलेस में युवा पंचायत प्रतिनिधियों का एक सम्मेलन चल रहा था। यहां केदारनाथ की विधायक आशा नौटियाल, जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम कठैत और विधायक भरत चौधरी जैसे प्रमुख नेता जुटे हुए थे। जैसे ही निर्माण की खबर फैली, विरोधी वहां पहुंच गए और नेताओं को घेर लिया। उन्होंने स्टेडियम का काम तुरंत रोकने की मांग की।

स्थिति इतनी गर्म हो गई कि महिलाओं ने मुख्य द्वार बंद कर दिया, और करीब दो घंटे तक विधायक आशा नौटियाल को वहां रोके रखा। नारेबाजी और बहस के बीच माहौल तनावपूर्ण रहा, लेकिन पुलिस की मौजूदगी से कोई बड़ा हादसा टल गया।

राजनीतिक रंग लेता विवाद

विरोध प्रदर्शन के दौरान आंदोलनकारी लगातार विधायक से कहते रहे कि वे खुद निर्माण स्थल पर जाकर काम रुकवाएं। आखिरकार, लंबी जद्दोजहद के बाद विधायक वहां पहुंचीं, लेकिन तब तक वहां त्रिभुवन चौहान लोगों को संबोधित कर रहे थे। एक तरफ विधायक के खिलाफ नारे लगने लगे, तो दूसरी तरफ चौहान के समर्थन में आवाजें उठीं।

इससे पूरा मामला राजनीतिक मोड़ लेता दिखा, जहां स्थानीय मुद्दा पार्टियों की खींचतान में बदल गया। उत्तराखंड में ऐसे विवाद अक्सर देखे जाते हैं, जहां विकास की योजनाएं स्थानीय परंपराओं से टकराती हैं। उदाहरण के लिए, राज्य में पर्यटन और बुनियादी ढांचे के प्रोजेक्ट्स पर अक्सर पर्यावरण और सांस्कृतिक आधार पर विरोध होता है।

प्रशासन की भूमिका और आगे की चुनौतियां

प्रशासन ने स्थिति पर काबू पाने के लिए फौरन कदम उठाए। तहसीलदार ऊखीमठ रमेश रावत ने बताया कि पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेज दी गई है। वे कहते हैं कि ऊपर से मिलने वाले निर्देशों के आधार पर आगे कार्रवाई होगी। इसी बीच विधायक आशा नौटियाल ने विरोधियों को भरोसा दिलाया कि उनकी शिकायतों को गंभीरता से लिया जाएगा।

वे संबंधित विभागों से बात करके कोई बीच का रास्ता निकालने की कोशिश करेंगी। लेकिन आंदोलनकारी अब और सख्त रुख अपनाने की चेतावनी दे रहे हैं, जिससे आने वाले दिनों में तनाव बढ़ सकता है।

यह घटना हमें याद दिलाती है कि विकास और संरक्षण के बीच संतुलन कितना जरूरी है। रुद्रप्रयाग जैसे पहाड़ी इलाकों में, जहां प्राकृतिक और सांस्कृतिक धरोहरें प्रमुख हैं, ऐसी योजनाओं को लागू करने से पहले स्थानीय समुदायों की राय लेना महत्वपूर्ण होता है। अगर यह विवाद सुलझ नहीं पाया, तो यह बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है, जैसा कि पहले चारधाम प्रोजेक्ट में देखा गया था।

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