---Advertisement---

डोईवाला में बिना नक्शे चल रही जामा मस्जिद एमडीडीए ने की सील, वक्फ बोर्ड में नहीं थी रजिस्टर्ड

By
On:
Follow Us
Join Our WhatsApp Channel


उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से कुछ ही दूरी पर बसा डोईवाला क्षेत्र इन दिनों एक निर्माण विवाद के कारण चर्चा में है। यहां एक आवासीय इमारत में बिना किसी आधिकारिक अनुमति के जामा मस्जिद चलाई जा रही थी।

मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण, जिसे एमडीडीए के नाम से जाना जाता है, ने इस पर सख्त कदम उठाते हुए इमारत को सील कर दिया। यह कार्रवाई शहर के नियोजित विकास को सुनिश्चित करने के लिए की गई, जहां अवैध निर्माणों पर नजर रखना प्राधिकरण की जिम्मेदारी है।

एमडीडीए क्या है और क्यों जरूरी है इसकी भूमिका?

एमडीडीए एक सरकारी संस्था है जो मसूरी और देहरादून के आसपास के इलाकों में शहरी विकास को नियंत्रित करती है। इसका मुख्य उद्देश्य है कि कोई भी निर्माण बिना नक्शे या अनुमति के न हो, ताकि शहर सुरक्षित, व्यवस्थित और पर्यावरण के अनुकूल बने। भारत में ऐसे प्राधिकरणों की जरूरत इसलिए बढ़ गई है क्योंकि तेजी से बढ़ती आबादी और शहरीकरण से अवैध निर्माण आम हो गए हैं।

राष्ट्रीय स्तर पर देखें तो 2023 के एक सर्वे में पता चला कि देश के 60% से ज्यादा शहरों में अवैध निर्माण एक बड़ी समस्या है, जो भूकंप या अन्य आपदाओं में जान-माल का नुकसान बढ़ा सकता है।

विवाद की जड़: बिना नक्शे का निर्माण

डोईवाला के थानों तहसील में कण्डोगल और कुड़ियाल गांवों के बीच एक पुरानी आवासीय इमारत के ऊपरी तलों पर जामा मस्जिद का संचालन हो रहा था। इंतजामिया कमेटी द्वारा संभाली जा रही यह मस्जिद लगभग 800 वर्ग फुट के क्षेत्र में फैली थी, लेकिन इसके लिए कोई आधिकारिक मानचित्र या अनुमति नहीं ली गई थी। एमडीडीए को जब इसकी जानकारी मिली, तो उन्होंने तुरंत जांच शुरू की। ऐसे मामलों में प्राधिकरण पहले नोटिस जारी करता है, ताकि लोग अपनी गलती सुधार सकें, लेकिन यहां ऐसा नहीं हुआ।

नोटिस और सुनवाई की प्रक्रिया

नवंबर 2024 में एमडीडीए ने उत्तराखंड नगर एवं ग्राम नियोजन अधिनियम के तहत एक कारण बताओ नोटिस जारी किया। इस नोटिस में निर्माण रोकने और दस्तावेज जमा करने को कहा गया था। कई सुनवाई की तारीखें तय की गईं, लेकिन कमेटी की ओर से कोई जवाब या कागजात नहीं आए। यह प्रक्रिया पारदर्शिता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे सभी पक्षों को अपना पक्ष रखने का मौका मिलता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी लापरवाही से न केवल कानून का उल्लंघन होता है, बल्कि स्थानीय समुदाय में तनाव भी बढ़ सकता है।

रजिस्ट्रेशन की कमी और जांच के नतीजे

जांच में पता चला कि यह मस्जिद उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के रिकॉर्ड में दर्ज नहीं है। वक्फ बोर्ड धार्मिक संपत्तियों का प्रबंधन करता है और मार्च 2025 के एक पत्र में इसकी पुष्टि की गई कि इलाके में ऐसी कोई मस्जिद रजिस्टर्ड नहीं। इसी तरह, मदरसा शिक्षा परिषद ने भी बताया कि कोई मान्यता प्राप्त मदरसा यहां नहीं चल रहा।

ये दस्तावेज एमडीडीए के लिए निर्णायक साबित हुए, क्योंकि वे साबित करते हैं कि निर्माण पूरी तरह अवैध था। भारत में वक्फ संपत्तियों की संख्या करीब 8 लाख है, लेकिन कई मामलों में रजिस्ट्रेशन की कमी से विवाद होते रहते हैं।

कार्रवाई का दिन और पुलिस की मौजूदगी

एमडीडीए की टीम ने भारी पुलिस बल के साथ जाकर इमारत को सील किया। यह कदम इसलिए उठाया गया क्योंकि बार-बार शिकायतें आ रही थीं और कमेटी पर मामले को जानबूझकर लंबा खींचने का शक था। ऐसी कार्रवाइयों में पुलिस की मदद लेना आम है, ताकि कोई अशांति न हो। प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना है कि यह सिर्फ एक शुरुआत है और आगे भी अवैध निर्माणों पर नजर रखी जाएगी।

एमडीडीए अधिकारियों के विचार

एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने इस कार्रवाई को जरूरी बताते हुए कहा कि प्राधिकरण किसी भी बिना अनुमति के निर्माण को सहन नहीं करेगा। उन्होंने जोर दिया कि शहर के विकास, सुरक्षा और पारदर्शिता के लिए ऐसी सख्ती जरूरी है। इसी तरह, सचिव मोहन सिंह बर्निया ने बताया कि निर्णय सभी तकनीकी रिपोर्टों और कानूनी प्रावधानों पर आधारित है। वे कहते हैं कि नियम तोड़ने वालों पर आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी। ये बयान दर्शाते हैं कि एमडीडीए शहरी विकास के लिए कितना प्रतिबद्ध है।

भविष्य में क्या होगा?

यह घटना देहरादून जैसे बढ़ते शहरों में निर्माण नियमों की अहमियत को रेखांकित करती है। अगर ऐसे मामले बढ़ते रहे, तो शहर की संरचना बिगड़ सकती है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि कोई भी निर्माण शुरू करने से पहले स्थानीय प्राधिकरण से अनुमति लें, ताकि कानूनी झंझटों से बचा जा सके। स्थानीय निवासियों के लिए यह एक सबक है कि विकास हमेशा नियमों के दायरे में होना चाहिए।

The post डोईवाला में बिना नक्शे चल रही जामा मस्जिद एमडीडीए ने की सील, वक्फ बोर्ड में नहीं थी रजिस्टर्ड appeared first on Devpath.

Leave a Comment