उत्तराखंड में सरकारी विभागों की ऑनलाइन सेवाएं इन दिनों साइबर खतरों का सामना कर रही हैं। हाल ही में श्रम विभाग की आधिकारिक वेबसाइट हैकर्स के निशाने पर आई, जिससे कई महत्वपूर्ण सेवाएं ठप हो गईं। मजदूरों के रजिस्ट्रेशन, लाभ योजनाओं की जानकारी और अन्य ऑनलाइन सुविधाएं प्रभावित हुईं, जिससे विभाग के रोजमर्रा के कामकाज में काफी दिक्कतें आईं।
यह घटना कोई नई नहीं है। भारत में सरकारी वेबसाइटों पर साइबर हमले बढ़ते जा रहे हैं। राष्ट्रीय स्तर पर हर साल हजारों ऐसे मामले सामने आते हैं, जहां हैकर्स डेटा चुराने या सिस्टम को बाधित करने की कोशिश करते हैं। उत्तराखंड में भी पिछले कुछ समय से ऐसी घटनाएं आम हो गई हैं।
पिछली बड़ी घटनाएं और सबक
करीब एक साल पहले राज्य के मुख्य डेटा सेंटर पर बड़ा हमला हुआ था, जिसे कुछ रिपोर्ट्स में विदेशी हैकर्स से जोड़ा गया। उस समय सचिवालय से लेकर कई विभागों की सेवाएं हफ्तेभर से ज्यादा समय तक प्रभावित रहीं। लाखों लोगों की ऑनलाइन सुविधाएं रुक गईं, और सरकार को सिस्टम बहाल करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।
ऐसे हमलों से डेटा लीक का खतरा रहता है, जो नागरिकों की निजी जानकारी को जोखिम में डाल सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि पुराने सॉफ्टवेयर, कमजोर पासवर्ड और नियमित अपडेट की कमी ऐसी घटनाओं की मुख्य वजहें हैं।
इस हमले की जांच और कारण
श्रम विभाग के अधिकारियों की टीम अभी हमले की गहराई से पड़ताल कर रही है। शुरुआती संकेतों से लगता है कि यह हमला विदेश से किया गया हो सकता है। हैकर्स अक्सर विदेशी सर्वरों का इस्तेमाल करते हैं ताकि उनकी पहचान छिप सके।
राज्य में ज्यादातर सरकारी डेटा की देखभाल आईटी डेवलपमेंट एजेंसी (आईटीडीए) करती है। लेकिन श्रम विभाग ने अपनी वेबसाइट को निजी क्लाउड सर्वर पर चलाया हुआ है, इसलिए यह आईटीडीए की सीधी निगरानी में नहीं थी। यही वजह रही कि नियमित सुरक्षा जांच से यह बाहर रही।
आईटीडीए के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ऐसे हमले कभी-कभी होते रहते हैं, लेकिन इस बार दूसरे विभागों पर कोई असर नहीं पड़ा। फिर भी, यह घटना सभी विभागों के लिए चेतावनी है कि अपनी डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करें।
सरकार क्या कदम उठा रही है
आईटीडीए की तकनीकी टीम श्रम विभाग को पूरा सहयोग दे रही है। डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नए फायरवॉल और अपडेट्स लगाए जा रहे हैं। राज्य सरकार अब सभी विभागों में साइबर सुरक्षा को प्राथमिकता दे रही है, जैसे नियमित ऑडिट और कर्मचारियों को ट्रेनिंग।
विदेशी हमले बड़ी चुनौती हैं, क्योंकि हैकर्स लगातार नए तरीके अपनाते हैं। लेकिन मजबूत तैयारी से ऐसे खतरों को कम किया जा सकता है। नागरिकों को भी सलाह है कि सरकारी वेबसाइटों पर मजबूत पासवर्ड इस्तेमाल करें और संदिग्ध लिंक्स से बचें।
यह घटना हमें याद दिलाती है कि डिजिटल युग में सुरक्षा कितनी जरूरी है। उम्मीद है कि जल्द ही सेवाएं पूरी तरह बहाल हो जाएंगी और भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।
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